ईरान ने होमुर्ज से भारत की जहाजों को दिया ग्रीन सिग्नल तो पाकिस्तानी एक्सपर्ट को लगी मिर्ची, बोले - 'इस लड़ाई में हम...'
अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के 2 एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी कुल 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच रहे हैं. यह देख पकिस्तान बौखला गया है.

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन रोक दिया गया था. ऐसे में भारत के दो एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी कुल 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच रहे हैं. ईरान ने इन जहाजों को रास्ता दिया, जिसकी वजह से पाकिस्तान में खलबली मच गई है. पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने इस पर गुस्सा जाहिर किया और कहा कि पाकिस्तान को भी ईरान से ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए.
पाकिस्तानी एक्सपर्ट का गुस्सा और सवाल
कमर चीमा ने कहा कि ईरान ने भारत को दोस्त बताकर जहाजों को गुजरने की इजाजत दी, लेकिन पाकिस्तान के जहाज क्यों फंसे हैं? उन्होंने पूछा कि अगर ईरान ने ट्रैफिक रोक दिया है, तो भारत को मिली छूट पाकिस्तान के लिए क्यों नहीं है. चीमा का कहना है कि पाकिस्तानी जनता इस बात से बहुत नाराज है.
वे बोले कि हम ईरान के साथ जंग में साथ खड़े हुए, अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर अफसोस जताया, इजरायल के खिलाफ बोले, लेकिन बदले में क्या मिला? पाकिस्तान सरकार चुप क्यों है?
उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति को भारत के प्रधानमंत्री का फोन करने का जिक्र किया और कहा कि हमारी सरकार क्या कर रही है? चीमा ने अपील की कि पाकिस्तान सरकार को ईरान से बात करनी चाहिए ताकि उनके जहाज भी गुजर सकें.
ईरान भारत को क्यों प्राथमिकता देता है?
चीमा ने माना कि ईरान भारत को कभी नाराज नहीं करेगा. भारत बड़ा देश है, उसके साथ बिजनेस और मजबूत संबंध बनाने का मौका है. ईरान क्षेत्रीय ताकत बनना चाहता है, इसलिए भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने में फायदा देखता है. वहीं पाकिस्तान के साथ रिश्ते अच्छे नहीं रहे. ईरान को पाकिस्तान से सिर्फ राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन मिलता है.
उन्होंने चाबहार पोर्ट का उदाहरण दिया, जहां भारत ने निवेश किया है. ईरान इससे खुश है क्योंकि यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान को किनारे लगाने में मदद करता है. साथ ही, पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील ईरान को पसंद नहीं.
पाकिस्तान की आर्थिक चिंता
चीमा ने चेतावनी दी कि अगर जहाज नहीं आए तो पाकिस्तान में एलपीजी और अन्य ईंधन की भारी कमी हो सकती है. सरकार 2300 अरब डॉलर सब्सिडी दे रही है, लेकिन यह कुछ हफ्तों तक ही चल पाएगी. उसके बाद आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ेगा, जो मुश्किल शर्तें लगाता है.
कुल मिलाकर, भारत को मिली यह राहत पाकिस्तान के लिए जलन का सबब बन गई है. एक्सपर्ट का कहना है कि रिश्तों को बैलेंस करके चलना पड़ता है, लेकिन पाकिस्तानियों को बुरा लग रहा है कि ईरान भारत को तरजीह दे रहा है. अब देखना है कि पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है.


