हर चुनौती के लिए तैयार ईरान, ट्रंप की चेतावनी पर तीखा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को "पूरी तरह तबाह" करने की धमकी के बाद, तेहरान ने कड़ा जवाब दिया है.भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने साफ कहा कि ईरान वॉशिंगटन की शत्रुतापूर्ण बयानबाजी से नहीं डरता और किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को "पूरी तरह नष्ट कर देने" की चेतावनी के बाद तेहरान ने कड़ा पलटवार किया है. ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान वाशिंगटन की शत्रुतापूर्ण बयानबाजी से बेपरवाह है और हर स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. एक ओर अमेरिका ईरान की आंतरिक स्थिति और विरोध प्रदर्शनों को लेकर आलोचना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की खुली धमकियां भी दी जा रही हैं.
हर स्थिति के लिए तैयार हैं
ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने मीडिया इंटरव्यू में कहा "यह बयान नया नहीं है. हम भी हर स्थिति के लिए तैयार हैं."
उन्होंने यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के जवाब में दी, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अगर उन्हें कुछ होता है तो ईरान को "धरती के नक्शे से मिटाया जा सकता है."
ट्रंप की खुली धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि यदि ईरानी नेताओं की ओर से कथित हत्या की धमकियां जारी रहीं, तो ईरान को "उड़ा दिया जाएगा." मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा,"अगर कुछ भी होता है, तो हम पूरे देश को उड़ा देंगे."
इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले की संभावना भी जताई और ईरान के सर्वोच्च नेता के 37 साल के शासन को समाप्त करने की बात कही. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन मध्य पूर्व सहित अमेरिकी केंद्रीय कमान क्षेत्र में एक विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूह तैनात कर रहा है.
ईरान का परमाणु हथियारों से इनकार
बढ़ते तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए इलाही ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपने रुख को दोहराया. उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की है.
उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई द्वारा जारी धार्मिक फतवे का हवाला देते हुए कहा."ईरान कभी परमाणु हथियार रखना नहीं चाहता था क्योंकि यह हराम है,"इलाही के अनुसार, ईरान की परमाणु गतिविधियां चिकित्सा उपचार, ऊर्जा उत्पादन और मानवीय जरूरतों तक सीमित हैं.
अंतरराष्ट्रीय निगरानी में दोहरे मापदंड का आरोप
इलाही ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान को प्रतिबंधों और कड़ी जांच का सामना करना पड़ता है, जबकि अन्य परमाणु-सक्षम देशों पर ऐसा दबाव नहीं बनाया जाता. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल इज़राइल और अमेरिका ने ईरानी परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था.
हम शांति और सुरक्षा चाहते हैं
तनाव के बावजूद ईरान ने शांति की बात दोहराई है. इलाही ने चेतावनी दी कि हालात और बिगड़े तो पूरे क्षेत्र को गंभीर नुकसान झेलना पड़ेगा.उन्होंने कहा,"हम शांति और सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे नहीं चाहते. यह सारी स्थिति कुछ लोगों ने पैदा की है. इससे पूरा क्षेत्र और मध्य पूर्व जल रहा है और सभी देश प्रभावित होंगे."
विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट बंदी पर सफाई
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद किए जाने को लेकर हुई आलोचना पर इलाही ने कहा कि यह कदम शांति बहाल करने के लिए उठाया गया था.
उन्होंने कहा,"ईरान ने अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बंद करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि हम समाज में शांति लाना चाहते थे. लेकिन हमारे पास स्थानीय इंटरनेट है और वह काम कर रहा है."
उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि विरोध प्रदर्शन विदेशी ताकतों द्वारा संचालित थे, हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का सहारा लेने का आरोप जरूर लगाया.
अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर सवाल
इलाही ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा,"वास्तव में, हम कह सकते हैं कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दुनिया में अपना प्रभाव खो दिया है और उनमें से कुछ देशों द्वारा नियंत्रित हैं."
उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय संगठन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और देशों व लोगों के हित में फैसले लेंगे.


