भारत को अलग-थलग करना हम सबके लिए मुसीबत, PAK से क्या मिलता...ट्रंप को उन्हीं की पार्टी के सांसद ने लगाई फटकार
अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद और डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के नेता रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत को अलग-थलग करना हम सबके लिए बड़ा मुसीबत साबित होगा. उन्होंने कहा कि भारत के मुकाबले पाकिस्तान अमेरिका में निवेश लाने में नाकाम रहा है. भारत न केवल निवेश आकर्षित करता है, बल्कि अमेरिका में खुद भी निवेश करता है.

नई दिल्ली : अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के वरिष्ठ नेता रिच मैककॉर्मिक ने पाकिस्तान की आर्थिक और रणनीतिक भूमिका पर खुलकर सवाल उठाए हैं. वॉशिंगटन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अपनी विशाल आबादी के बावजूद, अमेरिका में निवेश आकर्षित करने में पूरी तरह विफल रहा है. इसके विपरीत भारत न केवल अमेरिका से निवेश हासिल करता है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में स्वयं भी महत्वपूर्ण निवेश करता है.
भारत को अलग करना US के लिए भारी भूल
निवेश ही नहीं, अमेरिका में भी पूंजी लगा रहा है भारत
रिच मैककॉर्मिक ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की भूमिका केवल एक निवेश प्राप्त करने वाले देश की नहीं है. भारतीय कंपनियां अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जिससे वहां रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि 30 करोड़ की आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान से इस तरह का कोई आर्थिक योगदान देखने को नहीं मिलता. यह अंतर दोनों देशों की वैश्विक आर्थिक साख को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.
भारतीय प्रतिभा अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़
मैककॉर्मिक ने भारत की मानव संसाधन क्षमता की भी खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सिर्फ कुशल पेशेवर ही नहीं दे रहा, बल्कि वे लोग अमेरिका में तकनीक, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में खाली जगहों को भर रहे हैं. उनके अनुसार प्रतिभा किसी भी देश की असली ताकत होती है और भारत इस मामले में वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुका है.
PAK के साथ कोई गहरी आर्थिक साझेदारी नहीं
कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा ने भी मैककॉर्मिक की बातों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि भले ही हाल के समय में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ गर्मजोशी दिखी हो, लेकिन इसका असर वास्तविक निवेश में नजर नहीं आता. बेरा ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कंपनियां पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश नहीं कर रही हैं और न ही वहां कोई ठोस रणनीतिक आर्थिक साझेदारी आकार ले रही है. इसके उलट भारत में बड़े पैमाने पर अमेरिकी पूंजी निवेश हो रहा है.
ट्रंप 2.0 में भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ खटास देखने को मिली है. रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. व्हाइट हाउस का तर्क है कि रूसी तेल से होने वाली कमाई यूक्रेन युद्ध में मास्को की मदद कर रही है, जबकि भारत का कहना है कि उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देनी होगी.
रूसी तेल पर भारत के रुख की समझ
मैककॉर्मिक ने स्वीकार किया कि अमेरिका भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने से खुश नहीं है, लेकिन वह इसके पीछे की मजबूरी को समझता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक मजबूत राष्ट्रवादी नेता हैं, जो अपने देश के हितों को सर्वोपरि रखते हैं. उनके अनुसार सस्ते ऊर्जा संसाधनों का उपयोग करके भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, जो किसी भी जिम्मेदार नेतृत्व की पहचान है.
भारत-अमेरिका संबंध को बताया ‘विवाह जैसा’
भारत और अमेरिका के रिश्तों को मैककॉर्मिक ने एक मजाकिया लेकिन गहरे उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और व्यापार में संतुलन जरूरी है, ठीक वैसे ही जैसे एक शादीशुदा रिश्ते में होता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह समझना होगा कि भारत के साथ संतुलित साझेदारी ही लंबे समय तक फायदेमंद साबित होगी.
भारत को अनदेखा नहीं किया जा सकता
कुल मिलाकर, रिच मैककॉर्मिक का संदेश साफ और दो टूक था. भारत को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर भारी पड़ सकता है. दूसरी ओर, पाकिस्तान अब भी अमेरिकी निवेश और ठोस साझेदारी के मामले में पीछे खड़ा दिखाई देता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है.


