अयातुल्ला खामेनेई के पुत्र मोजतबा ईरान के नए सर्वोच्च नेता चुने गए: रिपोर्ट्स

ईरान से प्रसारित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, विशेषज्ञों की सभा ने अयातुल्ला अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

ईरान से प्रसारित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, विशेषज्ञों की सभा ने अयातुल्ला अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है. यह जानकारी ईरान इंटरनेशनल ने मंगलवार को सूत्रों के हवाले से दी. 

मोजतबा को सौंपी गई जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, सभा ने आंतरिक विचार-विमर्श के बाद 56 वर्षीय मोजतबा को यह जिम्मेदारी सौंपी. बताया जा रहा है कि मोजतबा, दिवंगत नेता खामनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं. लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखे जाते रहे है. राजनीतिक हलकों में उनके नाम की चर्चा पहले से थी, लेकिन औपचारिक चयन की खबर ने देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

मोजतबा की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है. इस्लामी गणराज्य स्वयं को राजशाही व्यवस्था से अलग और अधिक न्यायपूर्ण शासन मॉडल के रूप में प्रस्तुत करता रहा है. ऐसे में यदि सत्ता का हस्तांतरण पिता से पुत्र को होता है तो आलोचकों द्वारा इसे वंशवाद के रूप में देखा जा सकता है. इससे शासन की वैचारिक प्रतिबद्धताओं पर सवाल खड़े होने की संभावना जताई जा रही है.

रिपोर्ट में क्या आरोप लगाया गया? 

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने विशेषज्ञों की सभा पर मोजतबा के समर्थन के लिए दबाव डाला. आईआरजीसी ईरान की एक प्रभावशाली सैन्य और अर्धसैनिक इकाई है, जिसका देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में गहरा प्रभाव माना जाता है. वर्ष 2019 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस संगठन को आतंकवादी घोषित किया था, जिसके बाद से यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा है.

ईरान की शासन प्रणाली में सर्वोच्च नेता का पद अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है. यह पद सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ की भूमिका निभाता है और रक्षा, विदेश नीति तथा प्रमुख नीतिगत मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार रखता है. विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा लंबे समय से पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं और सर्वोच्च नेता के कार्यालय के संचालन में सक्रिय रहे हैं.

मोजतबा को मध्यम स्तर का धर्मगुरु माना जाता है. उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सैन्य सेवा भी दी थी और उनके आईआरजीसी के साथ करीबी संबंध बताए जाते हैं. यदि उनका चयन औपचारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह ईरान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है.

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