रूस-यूक्रेन जंग पर मैक्रों की बड़ी पहल, क्या पुतिन सीजफायर के लिए मानेंगे?

रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं. पेरिस में हुई बड़ी सुरक्षा बैठक के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांति पहल को अहम बताया, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है, क्या रूस सीजफायर के लिए तैयार होगा?

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच करीब चार वर्षों से जारी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. हर बीतते दिन के साथ यह संघर्ष और अधिक घातक होता जा रहा है. इसी बीच शांति की उम्मीद को लेकर फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक अहम सुरक्षा बैठक हुई, जिसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का बड़ा बयान सामने आया है.

मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन के सहयोगी देशों के साथ पेरिस में हुई यह बैठक रूस की यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता को रोकने और शांति की दिशा में "एक महत्वपूर्ण कदम" है. इस बैठक से पहले मैक्रों ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी, जिसमें मौजूदा हालात और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई.

पेरिस बैठक में क्या हुआ?

इमैनुएल मैक्रों के मुताबिक, पेरिस में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर मंथन किया गया. इनमें रूस-यूक्रेन के बीच संभावित संघर्ष विराम (सीजफायर) की निगरानी, यूक्रेनी सेना को हथियार और सैन्य प्रशिक्षण देना, एक बहुराष्ट्रीय सेना की तैनाती और भविष्य में रूस की किसी भी आक्रामक कार्रवाई को रोकने के उपाय शामिल थे.

इस बैठक में अमेरिका सहित 25 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया. पूरी कवायद का मकसद रूस को सीजफायर के लिए राजी करना और यूक्रेन की सुरक्षा को मजबूत करना था. हालांकि, रूस की ओर से अब तक अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई गई है.

रूस का सख्त रुख, सीजफायर पर अड़े सवाल

रूस पहले ही साफ कर चुका है कि जब तक कोई व्यापक शांति समझौता नहीं होता, तब तक वह सीजफायर के लिए तैयार नहीं होगा. पेरिस बैठक के बावजूद रूस के इस रुख में फिलहाल कोई बदलाव नजर नहीं आया है. बैठक को लेकर मॉस्को की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है.

यूक्रेन को हथियार, ट्रेनिंग और सुरक्षा समर्थन

बैठक में यह तय किया गया कि रूस और यूक्रेन के बीच किसी भी संघर्ष विराम की निगरानी अमेरिकी नेतृत्व में की जाएगी. सहयोगी देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजफायर के बाद भी यूक्रेनी सेना को हथियार, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी समर्थन मिलता रहेगा, ताकि वह भविष्य में रूस की किसी भी आक्रामकता का मुकाबला कर सके.

इसके अलावा, यूक्रेन को दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी देने और उसके साथ मजबूत रक्षा सहयोग बनाए रखने पर भी चर्चा हुई. हालांकि, इन योजनाओं से जुड़ी कई अहम जानकारियों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है.

जेलेंस्की की अपील: ब्रिटेन और फ्रांस से निर्णायक मदद की मांग

मैक्रों ने बताया कि इस बैठक में अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जिसमें 25 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारी प्रतिनिधि शामिल हुए. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद थे.

बैठक के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि यूरोपीय देशों की सशस्त्र सेनाओं का सहयोग और ठोस प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है. उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांस से सैनिकों, हथियारों और तकनीकी सहायता की तैनाती को अहम बताया. हालांकि, कई देशों को सैनिक भेजने से पहले अपनी संसदों से मंजूरी लेनी होगी, जिससे कुछ प्रतिबद्धताएं अभी स्पष्ट नहीं हैं.

आगे की राह रूस के रुख पर निर्भर

इस बैठक में पांच प्रमुख बिंदुओं पर खास फोकस किया गया—संघर्ष विराम की निगरानी, यूक्रेनी सेना को दीर्घकालिक समर्थन, और जमीन, समुद्र व हवा में एक बहुराष्ट्रीय सेना की तैनाती. फ्रांस का मानना है कि आगे की रणनीति काफी हद तक रूस के आधिकारिक रुख पर निर्भर करेगी.

फिलहाल, पेरिस बैठक को शांति की दिशा में एक अहम कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या यह पहल वाकई रूस को सीजफायर के लिए तैयार कर पाएगी.

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