खामनेई के इस्लामिक युग का होगा अंत! लंदन में ईरान का झंडा फाड़कर फहराया पुराना शेर-सूरज वाला फ्लैग, जानें दोनों में क्या है अंतर

ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों ने ईरान के दूतावास पर चढ़कर वर्तमान इस्लामिक गणराज्य का झंडा उतार दिया और उसकी जगह 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले वाला शेर-सूरज वाला झंडा फहरा दिया.

Sonee Srivastav

ईरान में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच लंदन में एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम उठाया गया. 10 जनवरी 2026 को प्रदर्शनकारियों ने ईरान के दूतावास पर चढ़कर वर्तमान इस्लामिक गणराज्य का झंडा उतार दिया और उसकी जगह 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले वाला शेर-सूरज वाला झंडा फहरा दिया. यह घटना केंसिंग्टन इलाके में हुई, जहां सैकड़ों लोग 'फ्री ईरान' के नारे लगा रहे थे. कुछ देर बाद झंडा हटा दिया गया, लेकिन यह विरोध का मजबूत संदेश बन गया. 

सोशल मीडिया पर भी बदलाव

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने भी ईरान के झंडे वाले इमोजी को बदलकर शेर-सूरज वाला प्रतीक कर दिया. यह बदलाव 9 जनवरी से प्रभावी हुआ, जिससे ईरान के आधिकारिक अकाउंट्स पर भी पुराना झंडा दिखने लगा. प्रदर्शनकारियों ने इसे समर्थन के रूप में देखा. 

शेर-सूरज वाला झंडा क्या है?

यह झंडा हरा-सफेद-लाल तीन रंगों का है, बीच में एक तलवार लिए शेर और उसके पीछे सूरज का चित्र है. यह प्रतीक ईरान की हजारों साल पुरानी संस्कृति से जुड़ा है. शेर शक्ति, साहस और ईरानी पहचान का प्रतीक है, जबकि सूरज प्राचीन ईरानी आस्थाओं से संबंधित है.

यह झंडा अश्कानियन, सासानी, सफवी, अफ्शारी और काजार जैसे राजवंशों में इस्तेमाल होता रहा.1906 की संवैधानिक क्रांति के बाद इसे औपचारिक राष्ट्रीय झंडा बनाया गया. 1979 तक यह ईरान का आधिकारिक झंडा था. 

वर्तमान इस्लामिक झंडा में क्या अंतर?

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता खत्म हुई और अयातुल्ला खामेनेई के नेतृत्व में इस्लामिक रिपब्लिक बनी.1980 में नया झंडा अपनाया गया. इसमें भी हरा-सफेद-लाल तीन रंग है, लेकिन बीच में कोई शेर-सूरज नहीं है. हरे और लाल पट्टियों की किनारों पर कूफी लिपि में अल्लाहु अकबर 22 बार लिखा है.

हरा रंग इस्लाम और शहादत, सफेद शांति और ईमानदारी, लाल बलिदान और क्रांति के खून का प्रतीक माना जाता है. यह झंडा सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, बल्कि धार्मिक और क्रांति की विचारधारा से जुड़ा है. विरोधी इसे वर्तमान धार्मिक शासन का प्रतीक मानते है. 

प्रदर्शनों में इसका मतलब

विरोधकारी पुराने शेर-सूरज झंडे को इसलिए अपनाते है क्योंकि वे राजशाही या गैर-धार्मिक शासन की वापसी चाहते है. यह झंडा अब राजशाही समर्थकों और विदेश में रहने वाले ईरानियों के बीच विरोध का बड़ा प्रतीक बन गया है. प्रदर्शन दो हफ्ते से जारी है, जिसमें अब तक कम से कम 116 मौतें और 2,600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई है. इंटरनेट बंद होने से जानकारी सीमित है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि विरोध कितना गहरा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag