न्यूजीलैंड ने सबसे पहले मनाया नए साल का जश्न, ऑकलैंड में स्काई टावर से फटे 3500 आतिशबाजी के गोले, देखें वीडियो
New Year 2026: 1 जनवरी 2026 को पूरे दुनिया में धूमधाम से नया साल सेलिब्रेट किया गया. अलग-अलग टाइम जोन में जैसे ही आधी रात हुई, आतिशबाजी से आसमान रंग-बिरंगा हो गया.

New Year 2026: दुनिया ने 1 जनवरी 2026 को धूमधाम से नया साल सेलिब्रेट किया. अलग-अलग टाइम जोन में जैसे ही आधी रात हुई, आतिशबाजी से आसमान रंग-बिरंगा हो गया. कहीं जोरदार जश्न हुए, कहीं शांत परंपराएं निभाई गई. हर देश ने अपनी संस्कृति और माहौल के अनुसार नए साल को गले लगाया. आइए देखें दुनिया के कुछ प्रमुख स्थानों पर कैसे मनाया गया यह खुशी का पल
भारत में सुरक्षा के साथ दिखा उत्साह
भारत में नए साल का जश्न पूरे जोश के साथ मनाया गया. दिल्ली के इंडिया गेट और कनॉट प्लेस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. देर रात तक पार्टी और आतिशबाजी चलती रही. सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने करीब 20 हजार कर्मियों को तैनात किया. कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में शराब पीकर वाहन चलाने और स्टंट पर सख्त निगरानी रखी गई.
बेंगलुरु में एमजी रोड और ब्रिगेड रोड पर रौनक छाई रही. कश्मीर घाटी में गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी का मजा लेने आए सैलानी नए साल का स्वागत करने में जुटे. श्रीनगर के लाल चौक पर भी विशेष कार्यक्रम हुए. पूरे देश में उत्सव का माहौल रहा.
सबसे पहले नए साल में प्रवेश करने वाले देश
प्रशांत महासागर के छोटे द्वीप राष्ट्र किरिबाती ने सबसे पहले 2026 में कदम रखा. क्रिसमस द्वीप पर स्थानीय लोग पारंपरिक तरीके से जश्न मनाने जुटे। इसके बाद न्यूजीलैंड का नंबर आया. ऑकलैंड के स्काई टावर से शानदार आतिशबाजी हुई. बारिश के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतरे. टावर से करीब 3500 आतिशबाजियां छोड़ी गई, जो पांच मिनट तक लगातार चलती रहीं.
Happy New Year New Zealand! 🎉
— Massimo (@Rainmaker1973) December 31, 2025
Auckland welcomes in the new year with a fireworks display over its tallest building - the Sky Tower.pic.twitter.com/pZkqzrpm9d
ऑस्ट्रेलिया में उदासी के साये में जश्न
सिडनी में नए साल का स्वागत हार्बर ब्रिज पर आतिशबाजी से हुआ. लेकिन कुछ हफ्ते पहले बोंडी बीच पर हुई गोलीबारी की घटना ने माहौल पर असर डाला. इस हमले में 15 लोग मारे गए थे. इसके बावजूद हजारों लोग जश्न में शामिल हुए. पीड़ितों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया और पुल पर विशेष रोशनी की गई. इस दौरान सुरक्षा बहुत सख्त थी.
एशिया की विविधता भरे उत्सव
एशिया में हर जगह अलग-अलग अंदाज देखने को मिला. जापान में लोग मंदिरों में घंटियां बजाकर नए साल की शुरुआत करते हैं. सियोल में घंटियों की आवाज और रोशनी का प्रदर्शन हुआ. सिंगापुर और बैंकॉक में आतिशबाजी ने रात को रंगीन बना दिया. दुबई के बुर्ज खलीफा पर लेजर शो, संगीत और आतिशबाजी का शानदार नजारा था. बीजिंग के पास ग्रेट वॉल पर ढोल और उत्सव हुए. लोग 2026 की टोपियां पहने नाच-गाते दिखे.
इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बाढ़ की वजह से बड़े आयोजन सीमित रखे गए और प्रार्थना सभाएं हुई. हांगकांग ने सुरक्षा कारणों से आतिशबाजी रद्द कर वैकल्पिक कार्यक्रम किए.
यूरोप में आतिशबाजी से चमका पूरा शहर
यूरोप के शहरों ने परंपरा और नए तरीकों का मिश्रण पेश किया. लंदन में बिग बेन की घंटियों और टेम्स नदी पर आतिशबाजी से पूरा शहर चमक उठा. पेरिस, रोम और मैड्रिड में भी भव्य प्रदर्शन हुए. एथेंस और बर्लिन में बच्चों व पालतू जानवरों को ध्यान में रखकर कम शोर वाली आतिशबाजी और ड्रोन शो किए गए. अमेरिका और ब्राजील का जोशरियो डी जनेरियो में समुद्र तट पर पार्टियां, संगीत और आतिशबाजी हुई.
लोग सात लहरों पर कूदकर सौभाग्य की कामना करते दिखे. न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर प्रसिद्ध बॉल ड्रॉप की तैयारी जोरों पर थी. वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई.
गाजा में उम्मीद के बीच उदासी
युद्धग्रस्त गाजा में विस्थापित लोग तंबुओं में नए साल की शुरुआत कर रहे हैं. कई लोगों ने कहा कि 2025 दुख और नुकसान का साल था. अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 में शांति आए और युद्ध खत्म हो.


