शांति की मेज पर बातचीत, आसमान से बमबारी...रूस का कीव पर बड़ा हमला

रूस, यूक्रेन और अमेरिका की दो दिवसीय शांति वार्ता बिना स्पष्ट नतीजे के खत्म हुई. इसी बीच रूस के कीव पर हमले से हालात बिगड़े, बिजली और हीटिंग संकट गहराया. शांति समझौते को लेकर उम्मीद और संशय दोनों बने हुए हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के तहत रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच हुई दो दिवसीय त्रिपक्षीय शांति वार्ता शनिवार को समाप्त हो गई. हालांकि, वार्ता खत्म होने के बाद भी यह साफ नहीं हो सका है कि बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंची या नहीं. वार्ता ऐसे समय पर हुई, जब इसके कुछ ही घंटे पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर जोरदार हवाई हमला किया था, जिससे हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए.

कीव पर रूसी हमले से बिगड़े हालात

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस द्वारा किए गए रातभर के हवाई हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए. इस हमले का असर केवल जान-माल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कीव की बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई. हमले के बाद करीब 12 लाख घरों में बिजली गुल हो गई, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गईं.

कड़ाके की ठंड में हीटिंग संकट

हमले के समय कीव में तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास था. बिजली ग्रिड को नुकसान पहुंचने के कारण लगभग 6,000 इमारतों में हीटिंग सिस्टम काम नहीं कर पाया. कड़ाके की ठंड में हीटिंग बंद होने से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए हालात और गंभीर हो गए. स्थानीय प्रशासन ने आपात इंतजाम करने की कोशिश की, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके.

त्रिपक्षीय शांति वार्ता की शुरुआत

रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच यह त्रिपक्षीय शांति वार्ता शुक्रवार को शुरू हुई थी. यह बातचीत युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार इस स्तर पर हुई, जिसमें तीनों पक्ष एक साथ शामिल हुए. अमेरिका इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है.

पुतिन और ट्रंप के दूतों के बीच लंबी चर्चा

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ रातभर लंबी बातचीत की. इस दौरान यूक्रेन संकट और संभावित शांति समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. यह बैठक कई घंटों तक चली, जिससे उम्मीद जगी कि किसी समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है.

रूस की शर्तें बनीं बड़ी बाधा

खबरों के मुताबिक, रूस ने बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि किसी भी शांति समझौते के लिए यूक्रेन को अपने पूर्वी क्षेत्रों से सेना हटानी होगी. ये वही इलाके हैं, जिन पर रूस ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, हालांकि वह उन्हें पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाया है. रूस की यह मांग यूक्रेन के लिए बेहद संवेदनशील है और यही कारण है कि बातचीत में सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा.

समझौता लगभग तैयार

इससे पहले गुरुवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई थी कि संभावित शांति समझौता “लगभग तैयार” है. उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया था. ज़ेलेंस्की के इस बयान से संकेत मिला था कि कूटनीतिक स्तर पर कुछ प्रगति हुई है, लेकिन जमीनी हालात और रूस के हमले इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

आगे की राह पर संशय

शांति वार्ता के बावजूद रूस का कीव पर हमला यह दर्शाता है कि हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जमीन पर सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक किसी ठोस और टिकाऊ शांति समझौते तक पहुंचना मुश्किल होगा. फिलहाल, दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या युद्ध थमने की कोई वास्तविक उम्मीद बनती है या नहीं.

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