शीर्ष जनरल झांग यूक्सिया पर गिरी गाज, पद से किया बर्खास्त...जिनपिंग की कार्रवाई से पीएलए में हड़कंप, अभी कई और जनरल रडार पर

चीन में सेना में भ्रष्टाचार की जांच शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वरिष्ठ जनरल झांग यूक्सिया और लियू जेनली को बर्खास्त किया. यह कदम पीएलए में अनुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को तेज करता है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः चीन में सेना के भीतर लंबे समय से जारी भ्रष्टाचार की जांच अब शीर्ष स्तर तक पहुंच गई है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने सबसे वरिष्ठ जनरल झांग यूक्सिया को उनके पद से हटा दिया है. उन्हें भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के आरोपों की जांच के दायरे में लाते हुए बर्खास्त किया गया है. यह कदम चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए जा रहे अभियान को और गति देने का संकेत है.

हाल ही के महीनों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है. यह घटनाक्रम चीन की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में शामिल पीएलए के संगठन और प्रतिष्ठा पर असर डाल रहा है.

शीर्ष सैन्य अधिकारी झांग यूक्सिया पर कार्रवाई

चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) के उपाध्यक्ष और चीन के नंबर-1 जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ अनुशासन और कानून उल्लंघन के आरोपों की जांच चल रही है. झांग 1989 के तियानमेन स्क्वायर विरोध प्रदर्शनों के बाद से सेना में सबसे वरिष्ठ सक्रिय सदस्य रहे हैं. उनकी बर्खास्तगी ने चीन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान खींचा है.

सीएमसी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी सेना की सर्वोच्च कमान है. इस आयोग में झांग की उपस्थिति उन्हें पीएलए में सबसे उच्च रैंक का अधिकारी बनाती है. ऐसे में उनकी बर्खास्तगी चीन के सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है.

जांच के दायरे में अन्य अधिकारी

झांग के साथ, जनरल लियू जेनली भी जांच के दायरे में हैं. लियू सीएमसी के सदस्य और ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के चीफ ऑफ स्टाफ हैं. चीन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सीपीसी की केंद्रीय समिति ने विचार-विमर्श के बाद झांग और लियू के खिलाफ जांच शुरू करने का निर्णय लिया.

इस कार्रवाई ने चीनी सैन्य प्रतिष्ठान में हलचल पैदा कर दी है. विशेष रूप से झांग के खिलाफ यह कदम, जो 24 सदस्यीय पोलित ब्यूरो के भी सदस्य हैं, पार्टी और सेना दोनों के भीतर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है.

जिनपिंग ने शुरू किया था भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान

शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया था. इस अभियान के तहत पीएलए के दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी बर्खास्त किए गए या जेल भेजे गए. हाल के महीनों में यह कार्रवाई और तेज हो गई है. राष्ट्रपति की यह पहल चीन में सैन्य अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.

बता दें कि झांग और लियू की जांच सिर्फ दो अधिकारियों तक सीमित नहीं रह सकती. इससे पहले भी कई वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण बर्खास्त हो चुके हैं. यह अभियान चीन के सैन्य ढांचे में गहरी सफाई का संकेत देता है.

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