मिनियापोलिस गोलीकांड के बाद ICE कार्रवाई पर सवाल, सामाजिक कार्यकर्ता की मौत से अमेरिका में भड़का विरोध

मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोली से सामाजिक कार्यकर्ता रेनी गुड की मौत के बाद अमेरिका में व्यापक विरोध शुरू हो गया है. ट्रंप प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई और संघीय तैनाती के खिलाफ हजारों शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

Shraddha Mishra

मिनेसोटा: मिनियापोलिस, मिनेसोटा में 37 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता और तीन बच्चों की मां रेनी गुड की मौत के बाद पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के एजेंट द्वारा संघीय आदेशों के तहत की जा रही कार्रवाई के दौरान रेनी की गोली लगने से मौत हो गई थी. इस घटना के बाद प्रवासी अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. 

नागरिक अधिकार समूहों ने शनिवार और रविवार को पूरे देश में बड़े प्रदर्शन करने की घोषणा की है. आयोजकों के अनुसार, एक हजार से अधिक शहरों में रैलियां और मार्च होंगे. इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली रिपब्लिकन सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर आईसीई एजेंटों की तैनाती का विरोध करना है, जो मुख्य रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी शासित शहरों में की गई है. इन प्रदर्शनों को “ICE Out For Good” नाम दिया गया है.

पोर्टलैंड की गोलीबारी से बढ़ा तनाव

जानकारी के अनुसार, तनाव उस समय और बढ़ गया जब ओरेगन के पोर्टलैंड शहर में एक अमेरिकी सीमा गश्ती एजेंट ने वाहन रोकने के दौरान एक पुरुष और एक महिला को गोली मार दी. इसमें दोनों घायल हो गए, जिसने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव को और गहरा कर दिया.

मिनियापोलिस में क्या हुआ था?

बुधवार को मिनियापोलिस में रेनी गुड अपनी कार चला रही थीं. उसी दौरान एक आईसीई अधिकारी ने उन्हें गोली मार दी. यह घटना ऐसे समय हुई जब शहर में लगभग 2,000 संघीय अधिकारियों को तैनात किया गया था. गृह सुरक्षा विभाग ने इसे अब तक का सबसे बड़ा अभियान बताया. मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसे गैर-जिम्मेदार बताया.

विरोध और पुलिस कार्रवाई

शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों ने उस होटल के बाहर जोरदार विरोध किया, जहां कथित तौर पर आईसीई एजेंट ठहरे थे. लोग ढोल, सीटी और लाउडस्पीकर के जरिए शोर मचाते नजर आए. बाद में पुलिस ने इसे अवैध सभा घोषित किया और करीब 30 लोगों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.

मौत को लेकर अलग-अलग दावे

रेनी गुड के परिवार और स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह आईसीई की गतिविधियों पर नजर रखने वाली एक शांतिपूर्ण निगरानी में शामिल थीं. वहीं, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उन्होंने एजेंटों का पीछा किया और अधिकारी को खतरा हुआ, इसलिए गोली चलाई गई. हालांकि, सामने आए वीडियो इन दावों से मेल नहीं खाते. एक वीडियो में रेनी शांत दिखाई देती हैं और अधिकारी से टकराने की कोई कोशिश नजर नहीं आती.

जांच और कानूनी विवाद

घटना के बाद मिनेसोटा और हेनेपिन काउंटी की पुलिस ने अपनी अलग आपराधिक जांच शुरू की है. कुछ संघीय अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार को संघीय एजेंट पर मामला चलाने का अधिकार नहीं है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इससे असहमत हैं. यह मामला अब केवल एक गोलीबारी की घटना नहीं रहा, बल्कि संघीय शक्ति, राज्य अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संघर्ष का प्रतीक बन गया है.

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