शहबाज शरीफ का तारिक रहमान को न्योता, क्या भारत के लिए बढ़ेगी मुश्किलें?
बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही क्षेत्रीय कूटनीति ने नया मोड़ ले लिया है. शहबाज शरीफ ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान को पाकिस्तान आने का न्योता दिया है, जिससे यह इशारा मिलता है कि इस्लामाबाद ढाका में नई सरकार के साथ तेजी से रिश्ते बनाना चाहता है.

नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही क्षेत्रीय कूटनीति ने नया मोड़ ले लिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान को पाकिस्तान आने का औपचारिक निमंत्रण देकर संकेत दे दिया है कि इस्लामाबाद ढाका की नई सत्ता के साथ रिश्तों को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है.
फोन पर हुई बातचीत के बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को भी बढ़ा दिया है. BNP को हालिया चुनाव में दो-तिहाई बहुमत मिला है और करीब दो दशक बाद पार्टी सत्ता में वापसी कर रही है. ऐसे में पाकिस्तान की सक्रियता को दक्षिण एशिया की राजनीति में एक अहम संकेत माना जा रहा है.
शहबाज का 'भाईचारे' का संदेश
फोन पर बातचीत के बाद शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए तारिक रहमान को चुनाव जीतने पर बधाई दी और कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ ‘भाईचारे’ के रिश्ते मजबूत करना चाहता है.
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की विरासत का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के पुराने संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही. बातचीत के दौरान शहबाज ने तारिक रहमान को "अपना भाई" कहकर संबोधित किया.
BNP का झुकाव पारंपरिक रूप से पाकिस्तान की ओर माना जाता रहा है. ऐसे में इस्लामाबाद का यह संपर्क कूटनीतिक हलकों में विशेष महत्व रखता है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान ढाका में नई सरकार के गठन से पहले ही अपने रिश्तों की जमीन मजबूत करना चाहता है.
शहबाज को ढाका आने का न्योता
पाकिस्तानी रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग बढ़ाने और नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है. तारिक रहमान ने भी शहबाज शरीफ को बांग्लादेश आने का निमंत्रण दिया है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों को लेकर विभिन्न देशों की निगाहें ढाका पर टिकी हैं.
भारत के लिए क्यों अहम है बदलाव?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी सहयोग में करीबी तालमेल रहा. भारत के साथ उनके रिश्ते सकारात्मक माने जाते रहे हैं और उन्होंने सीमा पार गतिविधियों पर सख्ती भी दिखाई.
अब जब नई सरकार बनने जा रही है, तो पाकिस्तान की त्वरित सक्रियता को नई रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है.
बढ़ती सक्रियता और क्षेत्रीय चिंता
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश करता रहा है. अंतरिम सरकार के दौरान भी पाकिस्तानी मंत्री और सैन्य अधिकारी बांग्लादेश के दौरे पर गए थे.
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय हो सकती है, खासकर पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिहाज से. चुनावी नतीजों के अनुसार BNP और उसके सहयोगियों को 212 से अधिक सीटें मिली हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी और उसके साथियों को 70 सीटें हासिल हुई हैं.
जमात-ए-इस्लामी ने भारत सीमा से सटे क्षेत्रों में जीत दर्ज की है, जिसे पहले से संवेदनशील माना जाता रहा है. ऐसे में ढाका में नई सरकार और इस्लामाबाद की सक्रियता ने क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.


