हिंदुओं की हत्याओं पर फूटा शेख हसीना का गुस्सा! यूनुस सरकार को लताड़ा, भारत से की अपील
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता काजोल देवनाथ के अनुसार, दिसंबर 2025 से अब तक हिंदू समुदाय के कम से कम सात लोगों की हत्या हो चुकी है. यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है, क्योंकि परिषद ने इनमें से दो पीड़ितों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी तक साझा नहीं की है.

नई दिल्ली: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. भारत में रह रहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रही हिंसा और हत्याओं पर गहरी चिंता जताते हुए इसे बेहद दुखद बताया है.
उन्होंने कहा कि देश में जारी यह हिंसा सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है. गौरतलब है कि बांग्लादेश लगातार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि वह फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं.
अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस के सत्ता संभालने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को संगठित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब से यूनुस ने सत्ता संभाली है, तब से हजारों अल्पसंख्यकों ईसाइयों, हिंदुओं, बौद्धों और शांति पसंद अहमदिया मुसलमान को निशाना बनाया गया. और इसकी लगभग कोई जवाबदेही नहीं है.
धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर हमला
हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कुचलने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा क मंदिर, चर्च और मस्जिदों को तबाह किया जा रहा है, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति दबा दी जा रही है और महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर किया जा रहा है.
कट्टरपंथ और भीड़ मानसिकता का मेल
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि मौजूदा हमले धार्मिक कट्टरपंथ और भीड़ की मानसिकता के मेल का नतीजा हैं. उनके मुताबिक, अंतरिम सरकार ने इन ताकतों पर कोई लगाम नहीं लगाई है. उन्होंने दीपू दास की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि दीपू दास की हत्या बहुत ही वीभत्स अपराध था, जो दिखाता है कि कट्टरपंथ कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई एक घटना नहीं है.
हिंसा को वैचारिक जामा पहनाने का आरोप
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के नाम पर सही ठहराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इन सब को कट्टरपंथी विचारधारा के नाम सही ठहराया जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी हिंसा को सिर्फ मजबूत, लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए नेतृत्व के जरिए रोका जा सकता है, जो साफतौर पर कट्टरपंथ को खारिज करती है. साथ ही कानून के तहत अल्पसंख्यकों को पूरी और बराबरी की नागरिकता देती है.
भारत से क्या उम्मीद रखती हैं शेख हसीना
भारत की भूमिका पर बात करते हुए शेख हसीना ने कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का भरोसेमंद दोस्त रहा है और हम इस समर्थन का सम्मान करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि आज जो हिंसा सामान्य हो चुकी है, वो सिर्फ आंतरिक रूप से बांग्लादेश को ही नहीं, बल्कि हमारे पड़ोसियों को भी अलर्ट कर रही है. वो पड़ोसी जो उत्पीड़न और अराजकता होते हुए देख रहे हैं.
निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र की अपील
शेख हसीना ने भारत से अपील करते हुए कहा कि मैं भारत से लोकतांत्रिक सिद्धांतों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों, क्षेत्रीय शांति और बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव के मत पर अडिग रहने की अपील करती हूं. उन्होंने यह भी कहा कि एक स्थिर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश पूरे दक्षिण एशिया के लिए जरूरी है.
अल्पसंख्यकों पर हमलों के आंकड़े
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता के अनुसार, दिसंबर से अब तक हिंदू समुदाय के सात लोगों की हत्या हो चुकी है, हालांकि दो मामलों में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आई हैं. 2022 की जनगणना के मुताबिक, बांग्लादेश में लगभग 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 7.95 प्रतिशत हैं.


