साथ न देने वाले देशों पर टैरिफ...ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दी खुली धमकी, बढ़ा तनाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है और चेतावनी दी है कि जो देश उनके ग्रीनलैंड नियंत्रण के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर टैरिफ लगाया जा सकता है. इसके बाद यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ गया.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक कूटनीतिक रुख से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस बार उनका निशाना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की उनकी योजना का समर्थन नहीं करेंगे, उन पर टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बयान ने यूरोपीय सहयोगी देशों के साथ पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है.

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकी

व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि कुछ देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं करेंगे, तो उन पर टैरिफ लगाया जाएगा. उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है. यह कोई पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने टैरिफ और आर्थिक दबाव को कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की बात कही हो. इससे पहले उनका प्रशासन रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगा चुका है और हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं.

अमेरिका और यूरोप के बीच कूटनीतिक बैठक
इस बीच, अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वाशिंगटन में आमने-सामने बैठक हुई. इस बैठक में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल थे. डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी असहमति बनी हुई है और डेनमार्क को उम्मीद नहीं थी कि अमेरिका अपना रुख बदलेगा. हालांकि, इस बातचीत के दौरान तीनों पक्ष यह तय करने पर सहमत हुए कि एक हाई-लेवल वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा, जो संभावित समझौते के रास्ते तलाशेगा. इस समूह का उद्देश्य अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को समझते हुए डेनमार्क की “रेड लाइन्स” का सम्मान करना है.

डेनमार्क और सहयोगी देशों की सैन्य प्रतिक्रिया
कूटनीतिक बातचीत के बीच डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा की है. फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे और स्वीडन ने भी डेनमार्क का समर्थन करते हुए सीमित संख्या में सैनिक भेजने की घोषणा की है. अधिकारियों ने इसे प्रतीकात्मक लेकिन स्पष्ट समर्थन बताया है. ब्रिटेन और जर्मनी ने आर्कटिक सुरक्षा अभ्यास के तहत सीमित तैनाती की पुष्टि की है. डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोएल्स लुंड पाउल्सन ने कहा कि उनका लक्ष्य आर्कटिक क्षेत्र में अधिक स्थायी सैन्य मौजूदगी स्थापित करना और सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यास का विस्तार करना है.

आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
पूरा घटनाक्रम आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को उजागर करता है. अमेरिका की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की जिद और डेनमार्क के सहयोगी देशों के साथ मिलकर सैन्य तैयारी, इस क्षेत्र में वैश्विक तनाव को बढ़ा सकते हैं. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने नाटो से अपील की है कि वह आर्कटिक में एक “समन्वित उपस्थिति” विकसित करे, ताकि क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सके और बाहरी हस्तक्षेप का सामना किया जा सके.

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