कंपनी को 25,075 एच-1बी मिले, 27,000 अमेरिकी नौकरियां खत्म हुईं, वीजा प्रक्रिया पर व्हाइट हाउस ने जारी की 'फैक्टशीट'

व्हाइट हाउस ने एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर के नए शुल्क का समर्थन किया ताकि अमेरिकी श्रमिकों को कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से बचाया जा सके. इस कदम से भारतीय वीजा धारकों में चिंता फैल गई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नया शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा. भारत ने इस फैसले का गहराई से अध्ययन शुरू कर दिया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

व्हाइट हाउस ने शनिवार को एक फैक्टशीट जारी कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) के नए भारी शुल्क लगाने के फैसले का बचाव किया. इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों को कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से बचाना बताया गया है. प्रशासन ने कहा कि यह कदम अमेरिकी श्रमिकों को प्राथमिकता देने और रोजगार बढ़ाने के लिए जरूरी है.

अमेरिकी रोजगार की स्थिति

व्हाइट हाउस के अनुसार, वित्त वर्ष 2003 में आईटी सेक्टर में एच-1बी वीजा धारकों की हिस्सेदारी लगभग 32 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 65 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है. कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग के स्नातकों में बेरोजगारी दर भी चिंता का विषय बनी हुई है. कंप्यूटर विज्ञान स्नातकों की बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत और इंजीनियरिंग स्नातकों की 7.5 प्रतिशत है, जो अन्य विषयों की तुलना में अधिक है. एसटीईएम (STEM) क्षेत्रों में विदेशी श्रमिकों की संख्या 2000 से 2019 के बीच दोगुनी हो गई, जबकि अमेरिकी रोजगार में वृद्धि मात्र 44.5 प्रतिशत रही. यह दर्शाता है कि विदेशी कर्मचारियों की संख्या अमेरिकी श्रमिकों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ी है.

कंपनियों द्वारा अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी

व्हाइट हाउस ने कई उदाहरण भी दिए जहाँ बड़ी कंपनियों ने एच-1बी वीजा धारकों की संख्या बढ़ाने के बाद हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. एक कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 5,189 एच-1बी कर्मचारियों को मंजूरी दी, जबकि लगभग 16,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की. दूसरी कंपनी ने 1,698 नए एच-1बी वीजा लिए लेकिन जुलाई में 2,400 अमेरिकी कर्मचारियों को निकाला. ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि कंपनियां अमेरिकी श्रमिकों को वीजा धारकों से बदल रही हैं.

नए शुल्क का मकसद 

व्हाइट हाउस ने कहा कि यह नया शुल्क अमेरिकी श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए उठाया गया कदम है. ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि मतदाताओं ने अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने का मजबूत जनादेश दिया है, जिसे पूरा करने के लिए राष्ट्रपति हर संभव प्रयास कर रहे हैं. ट्रम्प ने विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां वापस लाने और अमेरिका में निवेश बढ़ाने के लिए कई नए व्यापार समझौतों पर भी काम किया है. अमेरिकी रोजगार लाभों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि ट्रम्प के कार्यकाल में रोजगार लाभ अमेरिकी मूल के श्रमिकों को मिले हैं, जबकि पिछले साल राष्ट्रपति बाइडेन के कार्यकाल में विदेशी श्रमिकों को रोजगार मिला.

भारतीय एच-1बी वीजा धारकों पर असर

यूएससीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से सितंबर 2023 के बीच जारी किए गए लगभग 4 लाख एच-1बी वीजा में से 72 प्रतिशत भारतीयों को दिए गए. नए शुल्क की घोषणा के बाद भारतीय वीजा धारकों में व्यापक चिंता और भ्रम फैल गया. कई लोग यात्रा योजनाएं रद्द करने लगे और कुछ वापस भारत लौटने की कोशिश कर रहे थे. आव्रजन वकीलों ने सलाह दी कि जो वीजा धारक या उनके परिवार अभी अमेरिका से बाहर हैं, वे जल्द से जल्द देश लौटें ताकि नए नियम लागू होने से पहले समस्याओं से बचा जा सके.

प्रशासन का स्पष्टीकरण

ट्रंप प्रशासन ने बाद में स्पष्ट किया कि नया 1,00,000 डॉलर का शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, मौजूदा वीजा धारकों पर इसका कोई असर नहीं होगा. इस नए शुल्क की शुरुआत 21 सितंबर से होगी, और इससे पहले जमा किए गए आवेदन इससे प्रभावित नहीं होंगे. अमेरिका में काम कर रहे हजारों पेशेवरों, खासकर भारतीयों के लिए यह स्पष्टीकरण बड़ी राहत लेकर आया.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस बदलाव का गहराई से अध्ययन करने की बात कही और चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से कई परिवारों को मानवीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. मंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा.

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