ट्रंप की ग्रीनलैंड पर बुरी नजर: यूरोप अलर्ट, क्या है 'मिशन आर्कटिक सेंट्री' ? जो ला रहा है NATO
यूरोपीय नेता मानते हैं कि अगर क्षेत्र में NATO अपनी मजबूत और साफ-साफ मौजूदगी दिखाए, तो ट्रंप का वो दावा कमजोर पड़ सकता है. ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा करने की बात कर रहे हैं.

नई दिल्ली: आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक वर्चस्व को लेकर यूरोप और अमेरिका के बीच खिंचाव तेज होता जा रहा है. यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी की अगुवाई में कई यूरोपीय देश ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. इस पहल का मकसद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह साफ संदेश देना है कि यूरोप और NATO आर्कटिक सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हैं.
साथ ही यह कदम स्वयं-शासित डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन की संभावित कब्जे वाली बयानबाजी के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है. यूरोपीय देशों का मानना है कि क्षेत्र में सामूहिक सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर वे अमेरिका की एकतरफा रणनीति को संतुलित कर सकते हैं.
NATO का नया सुरक्षा प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक साझा NATO मिशन का प्रस्ताव रखने की तैयारी में है. इस मिशन को ‘आर्कटिक सेंट्री’ नाम दिया जा सकता है, जो बाल्टिक सागर में रणनीतिक ठिकानों की रक्षा के लिए चल रहे ‘बाल्टिक सेंट्री’ मिशन की तर्ज पर होगा. इसका उद्देश्य आर्कटिक में NATO की मौजूदगी को और मजबूत करना है.
यूरोपीय कूटनीतिक सक्रियता तेज
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने सहयोगी देशों से हाई नॉर्थ, यानी आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाने का आह्वान किया है. हाल ही में उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज समेत कई नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की.
यूरोपीय नेतृत्व का मानना है कि NATO की सशक्त भूमिका दिखाकर ट्रंप के उस तर्क को कमजोर किया जा सकता है, जिसके तहत वे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कर रहे हैं.
ट्रंप के बयानों से बढ़ी बेचैनी
इस महीने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप प्रशासन की आक्रामक बयानबाजी फिर सुर्खियों में है. ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना ने यूरोपीय देशों को अपने रणनीतिक विकल्पों पर तेजी से काम करने को मजबूर कर दिया है.
रविवार रात ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड का मालिक बनेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका वहां मौजूद अपने सैन्य अड्डे पर फोर्स बढ़ा सकता है, लेकिन असली लक्ष्य स्वामित्व है. उनके अनुसार, अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता तो रूस या चीन कर सकते हैं, और यह उनके रहते नहीं होगा.
NATO की भूमिका पर अहम बैठक
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल इस सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात करेंगे. बातचीत में ग्रीनलैंड और आर्कटिक स्थिरता में NATO की भूमिका अहम मुद्दा रहेगी.
वेडेफुल ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है. रूस और चीन के साथ पुराने और नए प्रतिद्वंद्वों को देखते हुए हमें NATO के भीतर मिलकर जिम्मेदारी निभाने के तरीकों पर चर्चा करनी चाहिए.
ब्रिटेन और फ्रांस की अलग-अलग रणनीति
सूत्रों के अनुसार, कीर स्टारमर चाहते हैं कि ब्रिटेन और यूरोप अमेरिका के सामने अपनी ‘सॉफ्ट और हार्ड पावर’ की उपयोगिता दिखाकर ट्रंप को साथ रखें. चाहे वह यूक्रेन युद्ध में रूस का विरोध हो या यूरोप के नजदीक अमेरिकी सुरक्षा हित. यह रुख फ्रांस जैसे देशों से अलग है, जिन्होंने अमेरिकी दबाव को यूरोप के लिए खतरा बताया है.
पिछले सप्ताह स्टारमर और ट्रंप की बातचीत में यूरो-अटलांटिक सुरक्षा और हाई नॉर्थ में रूस की आक्रामकता रोकने पर सहमति बनी थी.
डेनमार्क की कूटनीतिक कोशिश
डेनमार्क को अब भी उम्मीद है कि वाशिंगटन की आगामी कूटनीतिक यात्रा से ट्रंप के रुख में नरमी आएगी. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और विवियन मोट्जफेल्ड्ट उन तथ्यात्मक भूलों और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए सुरक्षा दावों को चुनौती देने की तैयारी में हैं, जिनके आधार पर ग्रीनलैंड पर बहस तेज हुई है.
हालांकि ट्रंप ने सैन्य बल से इनकार नहीं किया है, लेकिन रूबियो ने सांसदों से कहा कि उद्देश्य हस्तक्षेप नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड को खरीदना है ताकि NATO की एकता पर सवाल न उठें.


