ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव से यूक्रेन में शांति की उम्मीद, पुतिन के लिए क्या है इसका मतलब?

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे इस संघर्ष ने अब एक नया मोड़ लिया है, जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव ने एक नई दिशा दिखाई है. इस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शांति की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन यह शांति किसकी शर्तों पर होगी, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे इस संघर्ष ने अब एक नया मोड़ लिया है, जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव ने एक नई दिशा दिखाई है. इस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शांति की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन यह शांति किसकी शर्तों पर होगी, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं. यूक्रेन की जमीन पर रूस का कब्जा और NATO की सदस्यता के मुद्दे ने युद्धविराम को एक कठिन चुनौती बना दिया है. क्या ट्रंप के प्रयास युद्ध को समाप्त करने में सफल होंगे, या पुतिन को युद्ध में और खुली छूट मिल जाएगी?

इस युद्धविराम प्रस्ताव की सबसे बड़ी शर्तों में से एक है कि यूक्रेन NATO का सदस्य नहीं बनेगा और रूस के कब्जे वाले इलाके पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में बने रहेंगे. इसके साथ ही, कीव से यूक्रेनी सेना को अपनी पोस्ट छोड़ने और असैन्यीकृत सीमा बनाने की बात भी की गई है, जिसमें पश्चिमी देशों की शांति सेना तैनात की जाएगी. लेकिन इस प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में उठते सवाल, युद्ध के भविष्य को लेकर और भी जटिल होते जा रहे हैं.

क्या है ट्रंप का युद्धविराम प्रस्ताव?  

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्ताव युद्धविराम की प्रक्रिया में रूस और यूक्रेन को मुख्य साझेदार मानता है, लेकिन इसमें यूरोप को कोई स्थान नहीं दिया गया है. ट्रंप का कहना है कि उन्हें शांति स्थापना के लिए यूरोप और जेलेंस्की की शर्तों से कोई मतलब नहीं, वे बस इस संघर्ष को समाप्त करना चाहते हैं. उनके अनुसार, यूक्रेन और रूस के बीच शांति स्थापित करने का तरीका सीधे दोनों देशों के बीच होगा, और ट्रंप इस शांति प्रक्रिया में खुद को प्रमुख भूमिका में मानते हैं.

ट्रंप का मानना है कि शांति प्रक्रिया में यूक्रेन को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन यूक्रेन की शर्तों के मुताबिक शांति वार्ता मुश्किल हो सकती है. ट्रंप का कहना है, “मुझे लगता है कि वो शांति चाहते हैं. उनके लोग मारे जा रहे हैं, वे शांति चाहेंगे.” हालांकि, जेलेंस्की के लिए शांति वार्ता में शामिल होने का मामला बहुत जटिल हो गया है, क्योंकि यूक्रेन ने रूस से कड़ा विरोध करते हुए अपनी शर्तों को आगे बढ़ाया है.

यूक्रेन और रूस के बीच तनाव, यूरोप की प्रतिक्रिया  

रूस-यूक्रेन युद्ध में यूरोप की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. एक तरफ यूरोपियन देशों का दबाव है, तो दूसरी ओर रूस के साथ समझौते के लिए अमेरिका की ओर से दबाव बढ़ रहा है. ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव से यूरोप के कई देश नाराज हैं, और उनका डर यह है कि यदि रूस को शांति के नाम पर और छूट मिली, तो यह उनके लिए खतरे की घंटी हो सकती है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी यूरोपियन देशों के दबाव में आकर अपने फैसले बदल सकते हैं, लेकिन फिलहाल उनका रुख भी इस संघर्ष को और जटिल बना रहा है.

US और रूस का प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब में शांति वार्ता के लिए पहुंचा  

शांति वार्ता के लिए रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों के प्रतिनिधिमंडल सऊदी अरब पहुंच चुके हैं. हालांकि, इस वार्ता में कीव को आमंत्रित नहीं किया गया है, लेकिन यूक्रेन का एक डेलिगेशन सऊदी अरब में मौजूद है. इस डेलिगेशन का उद्देश्य यूक्रेन की आर्थिक परियोजनाओं को प्रस्तुत करना बताया गया है, लेकिन इसका टाइमिंग सवालों के घेरे में है. वहीं, जेलेंस्की की UAE यात्रा और रूस के उप प्रधानमंत्री का वहां पहुंचना यह संकेत दे रहा है कि शांति वार्ता के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं.

क्या जेलेंस्की इस युद्धविराम में शामिल होंगे?  

जेलेंस्की की UAE यात्रा और ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव से जुड़े सवाल अब और गंभीर हो गए हैं. ट्रंप ने कहा है कि जेलेंस्की युद्धविराम में शामिल होने को सहमत हो गए हैं, लेकिन क्या वह अपनी शर्तों पर समझौता करेंगे? क्या वे इस प्रस्ताव पर राजी हो सकते हैं, जो रूस के कब्जे वाले इलाकों को मान्यता देता है? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में युद्धविराम वार्ता के परिणामों से ही मिल पाएगा.

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