यूक्रेन कभी नहीं झुकेगा...नए साल पर जेलेंस्की का ऐलान, कमजोर डील पर नहीं होंगे दस्तखत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने नए साल के मौके पर साफ़ कहा कि वे कमजोर या हल्की शांति डील बिल्कुल नहीं चाहते. कोई भी समझौता ऐसा नहीं होना चाहिए, जो भविष्य में यूक्रेन की सुरक्षा को फिर से खतरे में डाल दे.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नए साल की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए साफ कर दिया कि उनका देश युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन किसी भी कीमत पर नहीं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूक्रेन कमजोर शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा कोई भी करार देश के भविष्य से समझौता होगा. यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दावा किया है कि जारी युद्ध में अंततः रूस की जीत होगी.

रात ठीक 12 बजे से पहले दिए गए करीब 21 मिनट के टीवी संबोधन में जेलेंस्की ने लगभग चार साल से जारी युद्ध की थकान को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह थकान आत्मसमर्पण में नहीं बदलेगी. उन्होंने कहा कि यूक्रेन की जनता कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन देश की संप्रभुता और भविष्य पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

हम शांति चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन की कीमत पर नहीं

अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन क्या चाहता है? शांति? हां. किसी भी कीमत पर? नहीं. हम युद्ध का अंत चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन का अंत नहीं.” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई यूक्रेनी शहरों पर जर्मन कब्जे से भी लंबा खिंच चुका है.

आत्मसमर्पण की अटकलों को किया खारिज

अपने दफ्तर में बैठे जेलेंस्की ने युद्ध के बोझ को स्वीकार करते हुए कहा, “क्या हम थक चुके हैं? बहुत. क्या इसका मतलब है कि हम आत्मसमर्पण के लिए तैयार हैं? जो ऐसा सोचता है, वह पूरी तरह गलत है.” उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन किसी भी हाल में झुकने वाला नहीं है.

 जेलेंस्की का बयान

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि मजबूत सुरक्षा गारंटी के बिना किया गया कोई भी समझौता संघर्ष को और लंबा करेगा. उन्होंने कहा कि कमजोर समझौतों पर किया गया कोई भी हस्ताक्षर युद्ध को और भड़काता है. मेरा हस्ताक्षर केवल एक मजबूत समझौते पर होगा.

शांति वार्ता अंतिम चरण में, लेकिन असली मुद्दा बाकी

जेलेंस्की के अनुसार, मौजूदा कूटनीतिक प्रयास स्थायी समाधान पर केंद्रित हैं. उन्होंने कहा, “हर बैठक, हर फोन कॉल और हर फैसला इसी के लिए है कि वर्षों तक टिकने वाली शांति सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की अगुवाई में चल रही बातचीत, जिसमें पिछले सप्ताह फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई चर्चा भी शामिल है, लगभग पूरी हो चुकी है. जेलेंस्की ने कहा, “शांति समझौता 90 प्रतिशत तैयार है. लेकिन जो 10 प्रतिशत बाकी है, वही सब कुछ तय करेगा. शांति का भविष्य, यूक्रेन का भविष्य और यूरोप का भविष्य.

कब्जाए गए इलाकों पर टकराव

वर्तमान में रूस यूक्रेन के करीब 19 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किए हुए है, खासकर दक्षिण और पूर्वी क्षेत्रों में. मॉस्को चाहता है कि कीव डोनबास के उन हिस्सों से भी पीछे हटे, जिन पर रूसी सेना पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाई है.

जेलेंस्की ने इन मांगों को खारिज करते हुए कहा कि यूक्रेन मौजूदा मोर्चों को वहीं स्थिर करना चाहता है. उन्होंने रूसी दावों को धोखा बताते हुए कहा कि क्या अब भी कोई उन पर विश्वास करता है? दुर्भाग्य से हां. क्योंकि अक्सर सच से बचा जाता है और उसे कूटनीति कहा जाता है, जबकि असल में वह सूट पहने झूठ होता है.

पुतिन का दावा

उधर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी नए साल के संबोधन में युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि रूस को अब भी जीत पर भरोसा है. उन्होंने मोर्चे पर तैनात सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, “हमें आप पर और अपनी जीत पर विश्वास है.

पुतिन ने अपने भाषण में युद्ध को प्राथमिकता दी और अपने आवास पर कथित यूक्रेनी ड्रोन हमले के आरोपों का जिक्र नहीं किया, जिसे कीव पहले ही खारिज कर चुका है. गौरतलब है कि 31 दिसंबर को पुतिन के सत्ता में आने के 26 साल भी पूरे हुए.

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