यूक्रेन-रूस शांति वार्ता बिना समझौते के खत्म, अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू बातचीत निकली बेनतीजा
अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में हुई यूक्रेन-रूस वार्ता दूसरे दिन भी बिना समझौते खत्म हुई. इसी दौरान रूसी हवाई हमलों से यूक्रेन में बिजली व्यवस्था ठप हो गई. दोनों पक्ष आगे बातचीत को तैयार हैं, लेकिन शांति की राह अब भी कठिन है.

नई दिल्ली: युद्ध और शांति के बीच झूलते यूक्रेन संकट में एक बार फिर निराशा हाथ लगी है. अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में चल रही यूक्रेन और रूस के बीच वार्ता का दूसरा दिन बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गया. हालांकि बातचीत टूट नहीं गई है और अगले सप्ताहांत फिर से चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसी बीच, रूस की ओर से रातभर किए गए हवाई हमलों ने यूक्रेन के हालात और कठिन बना दिए हैं, जहां कड़ाके की ठंड में दस लाख से ज्यादा लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए.
वार्ता के बाद जारी आधिकारिक बयानों से यह साफ हुआ कि फिलहाल कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. फिर भी, कीव और मॉस्को दोनों ने संकेत दिया कि वे आगे बातचीत के लिए तैयार हैं. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर बताया कि चर्चा का मुख्य विषय युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्ते और उसके मापदंड थे.
रविवार को फिर हो सकती है बैठक
एक अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि अगले रविवार को अबू धाबी में फिर से बैठक हो सकती है. अधिकारी के अनुसार, बातचीत का माहौल सम्मानजनक था और दोनों पक्ष समाधान खोजने की कोशिश करते दिखे. उनका मानना है कि आगे की बैठकों से किसी अंतिम नतीजे की दिशा में बढ़ा जा सकता है.
संयुक्त अरब अमीरात सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधियों के बीच सीधे बातचीत हुई, जो पिछले लगभग चार साल से चल रहे युद्ध में बहुत कम देखने को मिली है. इन बैठकों में अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शांति ढांचे के अधूरे पहलुओं पर चर्चा की गई.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ये वार्ताएं मॉस्को या कीव में भी हो सकती हैं. उनका यह भी मानना है कि राष्ट्रपति पुतिन और जेलेंस्की की सीधी मुलाकात या फिर दोनों नेताओं की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ त्रिपक्षीय बैठक से पहले इस तरह की तैयारियां जरूरी हैं.
वार्ता से पहले यूक्रेन पर भारी हमला
वार्ता के दूसरे दिन से पहले ही रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. राजधानी कीव और दूसरे बड़े शहर खार्किव पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें दागी गईं. यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे साफ होता है कि रूस शांति की बजाय दबाव की राजनीति कर रहा है. यूक्रेनी वायु सेना के मुताबिक, इन हमलों में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया, जिससे बिजली और हीटिंग व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए.
डोनबास बना सबसे बड़ी अड़चन
वार्ता के दौरान एक बार फिर डोनबास क्षेत्र का मुद्दा सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया. रूस का कहना है कि वह डोनेट्स्क और लुहांस्क समेत पूरे डोनबास पर नियंत्रण चाहता है. वहीं, ज़ेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि यूक्रेन अपनी जमीन का कोई हिस्सा छोड़ने को तैयार नहीं है. अधिकांश यूक्रेनी नागरिक भी किसी तरह की क्षेत्रीय रियायत के खिलाफ हैं. सर्वेक्षण बताते हैं कि जनता इस मुद्दे पर सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है.
ठंड, अंधेरा और बढ़ती चिंता
लगातार हो रहे हमलों के कारण कीव समेत कई इलाकों में हालात बेहद खराब हो गए हैं. शून्य से नीचे तापमान में करीब आठ लाख लोग बिना बिजली के रह गए हैं. ज़ेलेंस्की ने कहा कि इन हमलों से साफ है कि यूक्रेन की हवाई रक्षा को मजबूत करने पर जो सहमति बनी है, उसे पूरी तरह लागू करना बेहद जरूरी है. कुल मिलाकर, अबू धाबी की वार्ता ने उम्मीद तो जगाई है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि शांति की राह अब भी लंबी और मुश्किल बनी हुई है.


