संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का बड़ा बयान, एक या दो ताकतों के फैसलों से नहीं सुलझेंगी वैश्विक समस्याएं

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान किसी एक शक्ति के दबदबे या दो महाशक्तियों द्वारा दुनिया को प्रभाव क्षेत्रों में बांटने से नहीं होगा. उन्होंने शांति, स्थिरता और विकास के लिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर दिया.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक राजनीति और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दुनिया की जटिल समस्याओं का समाधान किसी एक शक्ति के दबदबे या दो महाशक्तियों द्वारा दुनिया को प्रतिद्वंद्वी क्षेत्रों में बांटने से संभव नहीं है. उन्होंने साफ शब्दों में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की.

अपने कार्यकाल के दसवें और अंतिम वर्ष की शुरुआत के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में गुटेरेस ने अमेरिका और चीन दोनों को संदेश देते हुए कहा कि यदि विश्व को स्थिर, शांतिपूर्ण और विकासशील बनाना है, तो सहयोग और बहुपक्षीयता को मजबूत करना होगा.

एक शक्ति का दबदबा समाधान नहीं: गुटेरेस

एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, "वैश्विक समस्याओं का समाधान किसी एक शक्ति के दबदबे से नहीं होगा," बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी अमेरिका के संदर्भ में थी. उन्होंने आगे कहा, "न ही दो शक्तियों द्वारा दुनिया को प्रतिद्वंद्वी प्रभाव क्षेत्रों में बांटने से इनका समाधान होगा."

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक मंच पर अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार गहराती जा रही है.

बहुध्रुवीयता ही स्थिरता की कुंजी

जब उनसे इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया, तो गुटेरेस ने कहा,"हम और कई लोग भविष्य के संदर्भ में यह मानते हैं कि दो ध्रुव हैं, एक अमेरिका में केंद्रित और दूसरा चीन में केंद्रित... यदि हम एक स्थिर विश्व चाहते हैं, यदि हम एक ऐसा विश्व चाहते हैं जिसमें शांति कायम रह सके, जिसमें विकास व्यापक हो सके और जिसमें अंततः हमारे मूल्य प्रबल हों, तो हमें बहुध्रुवीयता का समर्थन करना होगा."

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी और चीनी दूतावासों ने इस टिप्पणी पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

ट्रंप की नीति और प्रभाव क्षेत्रों की वापसी

गुटेरेस की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में प्रभाव क्षेत्रों की अवधारणा को फिर से आगे बढ़ा रहे हैं. ट्रंप ने पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व को बहाल करने का संकल्प लिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा वर्ग अप्रचलित मानता है.

अंतरराष्ट्रीय शांति की जिम्मेदारी किसकी?

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा,"मेरी राय में, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की मूल जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की है." उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा,"यही कारण है कि सुरक्षा परिषद में सुधार करना इतना महत्वपूर्ण है. और यह देखना बहुत दिलचस्प है कि जो लोग संयुक्त राष्ट्र की अप्रभावीता की आलोचना करते हैं, वही लोग सुरक्षा परिषद के सुधार का विरोध कर रहे हैं."

संघर्षों से भरा रहा दूसरा कार्यकाल

गुटेरेस के दूसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के दौरान दुनिया ने कई बड़े संकट देखे. इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी, सूडान का संघर्ष, गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध, सीरिया गृहयुद्ध का तेज़ी से अंत और अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी जैसे घटनाक्रम शामिल हैं.

अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय संस्थाओं पर खतरा

गुटेरेस ने चिंता जताते हुए कहा,"अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो रहा है. सहयोग कमज़ोर पड़ रहा है. और बहुपक्षीय संस्थाएँ कई मोर्चों पर हमलों का सामना कर रही हैं."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के संघर्षों को दोषमुक्ति बढ़ावा दे रही है, जिससे अविश्वास और तनाव बढ़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का नकदी संकट और अमेरिका की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र इस समय गंभीर नकदी संकट से जूझ रहा है. इसका कारण यह है कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को स्वैच्छिक फंडिंग में भारी कटौती की है और नियमित व शांति रक्षा बजट के लिए अनिवार्य भुगतान से इनकार किया है.

मार्च में ट्रंप प्रशासन ने UN80 नामक सुधार कार्य बल का गठन किया, जिसका उद्देश्य लागत में कटौती और दक्षता बढ़ाना है. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र को "अत्यधिक क्षमता वाला" बताया, लेकिन साथ ही इसे प्रभावी न होने के लिए जिम्मेदार ठहराया.

'हम हार नहीं मानेंगे': गुटेरेस

सभी चुनौतियों के बावजूद गुटेरेस ने कहा,"सभी बाधाओं के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र हमारे साझा मूल्यों को साकार करने के लिए काम कर रहा है. और हम हार नहीं मानेंगे. हम शांति के लिए प्रयासरत हैं – न्यायपूर्ण और स्थायी शांति जो अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित हो."उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी शांति जरूरी है जो मूल कारणों का समाधान करे और किसी समझौते के बाद भी बनी रहे.

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