अमेरिका ने भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का किया ऐलान

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका फर्स्ट का बड़ा ऐलान कर दुनिया को चौंका दिया है! अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कदम उठाते हुए अमेरिका को 66 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बाहर निकालने का फैसला किया है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को केंद्र में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है. ट्रंप ने एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर साइन कर अमेरिका को उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, समझौतों और संधियों से बाहर निकालने का निर्देश दिया है, जिन्हें उनके प्रशासन ने देश के हितों के खिलाफ बताया है.

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, अमेरिका भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत कुल 66 वैश्विक संस्थाओं से बाहर निकल रहा है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संगठन अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाते हैं.

व्हाइट हाउस का आधिकारिक ऐलान

व्हाइट हाउस द्वारा जारी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम में साफ किया गया है कि अमेरिका 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाओं से हटेगा. प्रशासन के मुताबिक, इन संगठनों में अमेरिका की भागीदारी अब देश

Trump exits global organizations
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के लिए फायदेमंद नहीं रही.

 

किन प्रमुख संगठनों से हट रहा है अमेरिका?

गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों की सूची में कई बड़े पर्यावरण और वैश्विक संस्थान शामिल हैं. इनमें भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज जैसे नाम शामिल हैं.

वहीं संयुक्त राष्ट्र से जुड़े जिन प्रमुख संगठनों से अमेरिका बाहर हो गया है, उनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीस बिल्डिंग कमीशन, यूएन एनर्जी, यूएन पॉपुलेशन फंड और यूएन वॉटर शामिल हैं.

नौकरशाहों को सब्सिडी देना बंद

इस फैसले को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया. उन्होंने लिखा कि आज, राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिका 66 अमेरिका-विरोधी, बेकार या फिजूलखर्ची वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों को छोड़ रहा है. इसके अलावा अन्य संगठनों की समीक्षा अभी भी जारी है.

रूबियो ने आगे कहा कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अमेरिकियों से किए गए एक अहम वादे को पूरा करते हैं. हम उन ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों को सब्सिडी देना बंद करेंगे, जो हमारे हितों के खिलाफ काम करते हैं. ट्रंप प्रशासन हमेशा अमेरिका और अमेरिकियों को सबसे पहले रखेगा.

ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला?

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी एग्जीक्यूटिव डिपार्टमेंट और एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे मेमोरेंडम में बताए गए संगठनों से अमेरिका को जल्द से जल्द बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करें. संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाओं के मामले में इसका मतलब यह होगा कि कानून के तहत जितनी इजाजत है, उतनी सीमा तक अमेरिका उन संगठनों में भागीदारी और फंडिंग दोनों को बंद करेगा.

कैबिनेट चर्चा और विदेश मंत्री की रिपोर्ट के बाद फैसला

मेमोरेंडम में कहा गया है कि यह फैसला विदेश मंत्री की रिपोर्ट पर विचार करने और कैबिनेट के साथ चर्चा के बाद लिया गया. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन संगठनों में अमेरिका की भागीदारी या उन्हें समर्थन देना देश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ था.

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