पाकिस्तान में हो सकती है अमेरिका-ईरान वार्ता, शहबाज शरीफ के न्योते पर ट्रंप की सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं. पाकिस्तान ने वार्ता की मेजबानी की पेशकश की है, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप की सहमति के संकेत मिलने के बाद इस्लामाबाद संभावित बातचीत का केंद्र बनता दिख रहा है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं. पाकिस्तान इस संभावित वार्ता का केंद्र बन सकता है, जहां दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए मंच तैयार किया जा रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दिशा में बड़ा संकेत देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण को स्वीकार करने के संकेत दिए हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शरीफ के संदेश का स्क्रीनशॉट साझा कर इस पहल को सार्वजनिक कर दिया.

शहबाज शरीफ का प्रस्ताव और ट्रंप की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री शरीफ ने X पर पोस्ट करते हुए कहा,"अमेरिका और ईरान की सहमति के अधीन, पाकिस्तान मौजूदा संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए सार्थक और निर्णायक वार्ता की सुविधा प्रदान करने हेतु मेजबानी करने के लिए तैयार और सम्मानित महसूस करता है."

ट्रंप ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर साझा किया, जिससे यह संकेत मिला कि वे इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपना रहे हैं.

पाकिस्तान संभावित मेजबान के रूप में उभरा

ट्रंप द्वारा वार्ता की संभावना जताने के कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान एक संभावित मेजबान के तौर पर सामने आ गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप पहले दावा कर चुके थे कि अमेरिका इस संघर्ष में “पहले ही जीत चुका है”, लेकिन अब उनका रुख बातचीत की ओर झुकता दिख रहा है.

ईरान का बदला रुख

ईरान ने शुरुआत में ट्रंप के गुप्त वार्ता वाले दावे को खारिज किया था, लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि उसे मित्र देशों के जरिए बातचीत के संकेत मिले हैं.

ईरान की ओर से वार्ता में कौन प्रतिनिधित्व करेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, हालांकि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ का नाम संभावित प्रतिनिधि के रूप में सामने आ रहा है.

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और संभावित बैठक

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस सप्ताह के अंत तक पाकिस्तान पहुंच सकते हैं.इसके साथ ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के भी इस वार्ता में शामिल होने की संभावना जताई गई है. बैठक का स्थान इस्लामाबाद हो सकता है.

आसिम मुनीर की भूमिका पर चर्चा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से बातचीत की पुष्टि की है, जबकि विदेश मंत्री इशाक डार भी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरघची के संपर्क में हैं.

इसी बीच यह भी खबर है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने पहले ही अमेरिकी प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

ट्रंप और पाकिस्तान के संबंध

ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल में पाकिस्तान उनकी विदेश नीति का अहम हिस्सा बना हुआ है. ट्रंप जिन आठ युद्धों को समाप्त करने का दावा करते हैं, उनमें मई 2025 का भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष भी शामिल है.
हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ था, जबकि पाकिस्तान ट्रंप को इसका श्रेय देने में पीछे नहीं रहा.

वैश्विक स्तर पर मध्यस्थता के प्रयास

पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की भी इस विवाद को सुलझाने की कोशिशों में लगे हैं. कतर ने भी सभी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही फ्रांस में जी7 देशों के साथ ईरान मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

भारत का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से फोन पर बातचीत के बाद कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप का फोन आया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ."

उन्होंने आगे कहा,"भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है. हमने शांति और स्थिरता के प्रयासों के संबंध में संपर्क में रहने पर सहमति जताई है."

वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा,"हमारी विदेश नीति प्रधानमंत्री मोदी की निजी विदेश नीति है. आप इसके परिणाम देख सकते हैं; हर कोई इसे एक मज़ाक समझ रहा है."

जारी संघर्ष और कड़ा रुख

शांति प्रयासों के बावजूद ईरान और इजराइल के बीच हमले जारी हैं. इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि अभियान "पूरी तीव्रता" से जारी रहेगा, जबकि एक अन्य मंत्री ने ट्रंप के बयानों को "धीरे-धीरे" लेने की बात कही.

ईरान ने भी कड़ा संदेश देते हुए कहा,"आंख के बदले आंख नहीं, बल्कि आंख के बदले सिर"

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित वार्ता के बावजूद हालात आसान नहीं हैं.विश्लेषक डेविड खल्फा ने कहा,"मैं बहुत संशय में हूं क्योंकि विश्वास पूरी तरह से खत्म हो चुका है और युद्धरत पक्षों के रुख पहले से कहीं अधिक भिन्न हैं."

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