US Tariff On India: 25% से 50%, फिर 18%... अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कितना शुल्क देगा भारत?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत पर लगने वाले टैरिफ को लेकर नई उलझन पैदा हो गई है. 25% से 50% और फिर 18% तक पहुंचा शुल्क अब 10% या 13.5% होने की चर्चा में है. भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के बीच यह बदलाव बड़ा आर्थिक असर डाल सकता है.

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान टैरिफ को एक बड़े आर्थिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. ट्रेड वॉर से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध तक, कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उन्होंने टैरिफ नीति के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपनाई. भारत भी इस सख्त अमेरिकी टैरिफ नीति से अछूता नहीं रहा.
अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को गैरकानूनी ठहराए जाने के बाद भारत पर लागू टैरिफ को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. सवाल यह है कि क्या भारत पर 18% टैरिफ जारी रहेगा, या फिर यह घटकर 10% या 13.5% हो जाएगा? आइए पूरे घटनाक्रम को क्रमवार समझते हैं.
भारत पर कैसे बढ़ता-घटता रहा अमेरिकी टैरिफ?
डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में वैश्विक स्तर पर टैरिफ लागू करने की शुरुआत की थी. शुरुआती चरण में भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया. बाद में अगस्त में इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया. इसके पीछे तर्क दिया गया कि भारत रूस से तेल आयात कर यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान रूस की मदद कर रहा है. इसी आधार पर 25% अतिरिक्त शुल्क को जुर्माने के रूप में जोड़ा गया.
50% टैरिफ लागू होने के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया और ट्रेड डील पर बातचीत भी प्रभावित हुई. हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच सहमति बनने पर ट्रंप ने अचानक टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया. उन्होंने यह दावा भी किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा, जिसके बाद अतिरिक्त 25% शुल्क समाप्त कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा गणित?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को रद्द करते हुए कहा कि राष्ट्रपति शांति काल में करीब 50 साल पुराने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का उपयोग कर इस तरह के टैरिफ लागू नहीं कर सकते. इस फैसले के बाद भारत पर लागू 18% टैरिफ का कानूनी आधार समाप्त हो गया.
यदि 18% टैरिफ निरस्त माना जाए, तो भारत पर मूल रूप से वही शुल्क लागू होगा जो उसे मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा प्राप्त होने के कारण देना पड़ता था, यानी करीब 3.5%.
10% ग्लोबल टैरिफ और 13.5% की नई स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की. यह धारा राष्ट्रपति को 150 दिनों तक अधिकतम 15% शुल्क लगाने की अनुमति देती है, जिसके बाद कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होती है.
ऐसे में यदि भारत पर 3.5% मूल शुल्क के साथ 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ जुड़ता है, तो कुल अमेरिकी टैरिफ 13.5% तक पहुंच सकता है.
ट्रंप और व्हाइट हाउस का अलग-अलग संकेत
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि भारत पर टैरिफ पहले से तय ट्रेड डील के अनुसार 18% ही रहेगा. हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि कानूनी स्थिति के अनुसार फिलहाल भारत पर 10% टैरिफ लागू होगा.
इस तरह भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसका ढांचा निश्चित रूप से बदल चुका है.


