क्या ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन से बदल जाएगा दुनिया का मैप? 46 साल बाद तेहरान में सुलगी विद्रोह की आग

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज़, 2000 से अधिक मौतें. अमेरिका और इजरायल सैन्य हस्तक्षेप के संकेत दे रहे हैं. तेल कीमतों में उछाल, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा. सत्ता परिवर्तन से वैश्विक जियोपॉलिटिक्स, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा समीकरण प्रभावित होंगे.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः ईरान में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं. हाल के महीनों में यहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर ने जोर पकड़ा है और अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों की सड़कों पर प्रदर्शनकारी रोज़ बढ़ते जा रहे हैं. जनता का गुस्सा और असंतोष इतना प्रबल है कि कई विशेषज्ञ इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद की सबसे बड़ी सामाजिक-राजनीतिक चुनौती मान रहे हैं.

अमेरिका का दखल 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है. उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है और सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान में संभावित सैन्य कार्रवाई की रणनीति तैयार की है. वहीं, गुरुवार और शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 63 डॉलर प्रति बैरल तक उछाल देखा गया, क्योंकि ईरान ओपेक का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है.

सत्ता विरोधी प्रदर्शन

ईरान में यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन इस बार विरोध की लहर असाधारण रूप से व्यापक और उग्र है. देश की नौ करोड़ की आबादी के बीच जनता में इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति विश्वास कम होता जा रहा है. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक दस हजार से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. प्रदर्शनकारियों में पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी और अन्य वैश्विक हस्तियों का समर्थन भी शामिल है.

इजरायल की चौकसी 

ईरान की स्थिति से इजरायल भी चिंतित है. अमेरिका और इजरायल दोनों ने संकेत दिए हैं कि अगर आंदोलनकारियों पर अत्याचार जारी रहा तो वे सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं. जून में ईरान और इजरायल के बीच लगभग 12 दिन तक संघर्ष हुआ था, जिसमें अमेरिका की भागीदारी भी रही. ईरान की सरकार गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों का समर्थन करती रही है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ जाता है.

वैश्विक प्रभाव और संभावित बदलाव

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा. इससे जियोपॉलिटिक्स, तेल और ऊर्जा बाजार, मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के समीकरण बदल सकते हैं. अमेरिका और इजरायल के लिए यह समय ईरान के भीतर बदलाव लाने का सुनहरा अवसर भी माना जा रहा है. अगर इस्लामिक रिपब्लिक का ढांचा कमजोर हुआ, तो वैश्विक स्तर पर शक्तियों के बीच नए समीकरण बन सकते हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag