हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये योगासन, जानें फायदे

आपका हृदय शरीर की संपूर्ण कार्यप्रणाली में अहम भूमिका निभाता है. इसलिए इसे स्वस्थ बनाए रखना अत्यंत ज़रूरी है. हृदय की सेहत के लिए उचित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है, जिसमें योग एक प्रभावी उपाय हो सकता है. कुछ विशेष योगासन ऐसे हैं जो दिल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं. नीचे ऐसे कुछ योगासनों का उल्लेख किया गया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

शरीर के सही कामकाज के लिए हृदय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है. यही वजह है कि दिल की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधियाँ आवश्यक हैं. इन्हीं गतिविधियों में योग एक बेहद प्रभावी और आसान विकल्प माना जाता है. योग न केवल तन को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है.

हालांकि आमतौर पर योग को सिर्फ़ आसनों तक सीमित समझा जाता है, लेकिन वास्तव में यह एक व्यापक प्रणाली है जिसमें यम, नियम, प्राणायाम, ध्यान और समाधि जैसे पहलू भी शामिल हैं. आसन यानी मुद्राएँ, शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने में मदद करती हैं और विशेष रूप से हृदय के लिए लाभकारी मानी जाती हैं.

ताड़ासन

इस सरल मुद्रा में शरीर सीधा खड़ा रहता है और ध्यान सांसों पर केंद्रित रहता है. यह मुद्रा शरीर के संतुलन और संरेखण को बेहतर बनाती है और गहरी सांसों के कारण रक्त संचार को सुचारु करती है. तनाव कम करने में भी यह सहायक है.

वृक्षासन

संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने वाला यह आसन पैरों को मजबूत करता है और स्थिर सांस लेने की प्रक्रिया के ज़रिए हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है.

अधोमुख श्वानासन 

यह मुद्रा मस्तिष्क और रीढ़ में रक्त प्रवाह को सुधारती है, जिससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है और उच्च रक्तचाप में भी राहत मिलती है.

सेतु बंधासन 

इस आसन से छाती खुलती है और श्वसन प्रणाली में सुधार होता है. यह फेफड़ों और हृदय को सक्रिय करता है. ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ाता है.

भुजंगासन 

यह पीठ झुकाने वाला आसन तनाव कम करता है और हृदय पर दबाव घटाता है. इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने की प्रक्रिया बेहतर होती है.

त्रिकोणासन

यह आसन शरीर को फैलाता है और छाती की क्षमता बढ़ाता है, जिससे गहरी सांस लेना संभव होता है और हृदय को लाभ होता है.

अर्ध मत्स्येन्द्रासन 

यह आसन पाचन को सुधारता है और छाती व रीढ़ के आसपास रक्त संचार को बढ़ाता है. इससे हृदय की क्रियाशीलता में सुधार होता है.

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