Lohri Celebration 2026: लोहड़ी पर गुड़, तिल और मूंगफली ही क्यों खाते हैं ? जानिए इसके पीछे जुड़ी पुरानी परंपरा के बारे में

आज यानी 13 जनवरी को पूरे देश में लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है. इस त्योहार को हम ढोल, नाच-गाना, मूंगफली, तिल और गुड़ को शामिल करके मनाते है. इस बीच आज हम आपको यह बताएंगे की इस पर्व को मनाने के लिए हम मूंगफली, तिल और गुड़ को शामिल क्यों करते है. इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है ?

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : हर साल 13 जनवरी को मनाया जाने वाला लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में सर्दियों के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है. इस दिन आग जलाई जाती है, ढोल की थाप पर नाच-गाना होता है और तिल, मूंगफली व गुड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ बांटे जाते हैं. आमतौर पर लोग इसे एक सांस्कृतिक परंपरा मानते हैं, लेकिन वास्तव में लोहड़ी का संबंध केवल उत्सव से नहीं, बल्कि शरीर की मौसमी जरूरतों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.

सर्दियों में शरीर की बदलती जरूरतें

आपको बता दें कि जनवरी का मध्य साल का सबसे ठंडा समय माना जाता है. इस दौरान शरीर खुद को गर्म रखने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च करता है. मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यदि इस मौसम में हल्का या ठंडी तासीर वाला भोजन लिया जाए, तो शरीर जल्दी थकान, जकड़न और कमजोरी महसूस करने लगता है. यही कारण है कि परंपरागत रूप से लोहड़ी पर ऐसे खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से गर्मी, ताकत और पोषण दें.

लोहड़ी और समय का प्राकृतिक संबंध
लोहड़ी के आसपास का समय प्राकृतिक रूप से शरीर की ऊष्मा संतुलन परीक्षा लेता है. ठंड में शरीर अधिक कैलोरी जलाता है और अंदरूनी गर्मी बनाए रखने की कोशिश करता है. इसे संतुलित रखने के लिए गर्म तासीर वाले, ऊर्जा से भरपूर और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है. लोहड़ी का पारंपरिक भोजन इसी सिद्धांत पर आधारित है, जिसे हमारे पूर्वजों ने अनुभव और प्रकृति के अवलोकन से विकसित किया.

तिल: सर्दियों का पारंपरिक सुपरफूड
तिल को आयुर्वेद में ठंड के मौसम के लिए बेहद उपयोगी माना गया है. इसमें मौजूद हेल्दी फैट और कैल्शियम शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं. तिल जोड़ों की अकड़न और ठंड से होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है. यही वजह है कि सर्दियों में तिल के लड्डू और चिक्की का सेवन आम है. लोहड़ी पर तिल खाने की परंपरा शरीर को अंदर से मजबूती देने से जुड़ी हुई है.

मूंगफली: ठंड में ऊर्जा का भरोसेमंद स्रोत
मूंगफली को अक्सर हल्के नाश्ते के रूप में देखा जाता है, लेकिन सर्दियों में इसका महत्व कहीं अधिक बढ़ जाता है. इसमें प्रोटीन और अच्छे फैट की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करती है. ठंड के मौसम में मूंगफली मांसपेशियों को ताकत देती है और कमजोरी से बचाती है. लोहड़ी की आग के पास बैठकर मूंगफली खाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से गर्म रखने का तरीका भी है.

गुड़: पाचन और ताकत का प्राकृतिक उपाय
लोहड़ी पर गुड़ का सेवन मिठास के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है. गुड़ पाचन तंत्र को सक्रिय करता है, ठंड में सुस्त हो चुके डाइजेशन को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. इसमें मौजूद आयरन थकान को कम करता है और शरीर को ताकत देता है. यही कारण है कि सर्दियों में गुड़ को सफेद चीनी से बेहतर माना जाता है.

तिल, मूंगफली और गुड़ का संतुलित संयोजन
इन तीनों चीजों को एक साथ खाने के पीछे भी वैज्ञानिक सोच छिपी है. तिल और मूंगफली में मौजूद फैट, गुड़ में पाए जाने वाले खनिज तत्वों को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है. यह संयोजन शरीर को गर्मी, ऊर्जा और बेहतर पाचन एक साथ प्रदान करता है, बिना ब्लड शुगर को अचानक बढ़ाए. इसे सर्दियों के लिए एक प्राकृतिक और संतुलित न्यूट्रिशन पैकेज कहा जा सकता है.

आधुनिक दौर में बदलती आदतें 
आज की जीवनशैली में लोहड़ी पर पारंपरिक खाने की जगह केक, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है. इससे त्योहार का असली उद्देश्य कहीं न कहीं खोता जा रहा है. सर्दियों में ठंडे और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ पाचन को कमजोर करते हैं और इम्यूनिटी पर भी असर डालते हैं, जिसका असर शरीर पर लंबे समय तक दिखाई देता है.

परंपरा नहीं, मौसम के अनुसार स्वास्थ्य विज्ञान
लोहड़ी का भोजन कोई साधारण रिवाज नहीं, बल्कि मौसम के अनुरूप शरीर को संतुलित रखने की एक वैज्ञानिक परंपरा है. तिल, मूंगफली और गुड़ मिलकर सर्दियों में शरीर को वही प्रदान करते हैं जिसकी उसे सबसे अधिक जरूरत होती है—गर्मी, ऊर्जा और मजबूत पाचन. यही कारण है कि लोहड़ी केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा एक समझदारी भरा पर्व भी है.

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