World Saree Day: हर साल क्यों मनाया जाता है विश्व साड़ी दिवस, क्या है इसका इतिहास और महत्व?
World Saree Day: 21 दिसंबर महिलाओं के लिए बेहद खास होता है क्योंकि आज के दिन से ही साड़ी पहनने की परंपरा दुनियाभर में फैली थी. इसीलिए आज का बड़े ही धूम-धाम के साथ अनेक देशों में मनाया जाता है.

हाइलाइट
- क्यों हैं महिलाओं के लिए 21 दिसंबर का दिन खास.
- आज भी किया जाता है परंपरा का पालन.
World Saree Day: दुनियाभर में आज 21 दिसंबर यानी विश्व साड़ी दिवस मनाया जा रहा है आज का दिन महिलाओं के लिए काफी खास होता है. साड़ी पहनने की परंपरा तो काफी समय से चलती आ रही है लेकिन अधिकतर महिलाएं आज भी यही सोचती हैं कि आखिर साड़ी पहनने की परंपरा कब और किसने शुरू की थी?
आज भी किया जाता है परंपरा का पालन
जिसके बाद यह दुनिया में तेजी के साथ फैली और अब तक इस परंपरा का पालन किया जा रहा है. साड़ी न केवल एक डिजाइन की होती है बल्कि अनेक प्रकार की देशों में मौजूद है साड़ियों की डिजाइन हर महीने बदलती रहती ही साथ ही महिलाओं के लिए नई-नई और प्यारी साड़ियों आती रहती हैं.
क्यों हैं महिलाओं के लिए 21 दिसंबर का दिन खास
भारत में रहने वाली महिलाएं अधिकतर साड़ी पहनना पसंद करती हैं. शादी हो या किसी रिश्तेदार के यहां जाना हो, महिलाएं अक्सर साड़ी में ही नजर आती हैं. साड़ी पहनना भारत की काफी सालों से परंपरा रही है जिसका आज भी पालन किया जाता है.
दुनिया में जब भारतीय परपंरा और रीति रिवाजों की बात होती है तो हमारे दिमाग में कई चीजें आती हैं. इनमें से साड़ी सबसे ज्यादा पॉपुलर मानी जाती है. 21 दिसंबर हर साल महिलाएं मनाती हैं. साथ ही महिलाएं आज के दिन भी नई-नई डिजाइनों की साड़ियों में नजर आती हैं.
जानें महत्व और इतिहास
साड़ी भारतीय महिलाओं की परंपरा रही है जिसका आज भी पालन बड़े ही शौक से किया जाता है. इस भारतीय पोशाक को अब विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है. भारत आईं विदेशी मेहमान भी साड़ी पहनकर भारतीयता का एहसास करती हैं.
हर साल साड़ी दिवस इस पोशाक को बनाने वाले बुनकरों के सम्मान में मनाया जाता है.यदि साड़ी के इतिहास की बता की जाएं, तो साड़ी का इतिहास 3000 साल से भी ज्यादा पुराना हैं. साड़ी नाम संस्कृत शब्द सारिका से लिया गया है. जिसका मतलब कपड़े का लंबा टुकड़ा होता है.


