गरुड़ पुराण: मरने से पहले तय हो जाता है अगला जन्म, जानिए पुनर्जन्म का रहस्य

गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु से जुड़े गहरे रहस्यों का वर्णन मिलता है. इस ग्रंथ के अनुसार इंसान का अगला जन्म मृत्यु के बाद नहीं, बल्कि उसके कर्मों और अंतिम समय की सोच के आधार पर पहले ही तय हो जाता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में शामिल गरुड़ पुराण जीवन, मृत्यु और आत्मा के रहस्यों को विस्तार से समझाता है. इस पुराण में भगवान विष्णु गरुड़ जी को बताते हैं कि मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसी होती है और व्यक्ति को अगला जन्म किन आधारों पर मिलता है.

गरुड़ पुराण के अनुसार, किसी इंसान का अगला जन्म मृत्यु के बाद तय नहीं होता, बल्कि उसके जीवनकाल में किए गए कर्मों और मृत्यु से पहले की मानसिक स्थिति के आधार पर पहले ही निर्धारित हो जाता है. पिछले जन्मों के कर्म, वर्तमान जीवन का आचरण और अंतिम समय में मन में चल रहे विचार—यही तीन तत्व पुनर्जन्म की दिशा तय करते हैं.

गरुड़ पुराण में पुनर्जन्म का सिद्धांत

गरुड़ पुराण में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है, जिनमें मानव जीवन को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इस ग्रंथ के अनुसार अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति को ऊंचा लोक या बेहतर जन्म प्राप्त होता है, जबकि पाप कर्म करने वालों को निचली योनि या नरक का सामना करना पड़ता है.

मृत्यु से पहले कैसे तय होता है अगला जन्म

गरुड़ पुराण के अनुसार जीवन का अंतिम समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. भगवान विष्णु बताते हैं कि इंसान जिस भाव और मानसिक स्थिति में शरीर त्यागता है, उसी के अनुसार उसका अगला जन्म तय होता है. यदि अंतिम समय में मन भगवान में लगा हो, विचार शुद्ध हों और मन शांत हो, तो आत्मा को श्रेष्ठ लोक या अच्छा जन्म मिलता है. इसके विपरीत यदि मन में लालच, क्रोध, वासना या नकारात्मक भाव हों, तो आत्मा को निम्न योनि में जाना पड़ता है.

धर्म का अपमान करने वालों को कैसा जन्म मिलता है

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो लोग धर्म, वेद-पुराण या भगवान का उपहास करते हैं, पूजा-पाठ से दूरी बनाते हैं और नास्तिकता का प्रचार करते हैं, उन्हें अपने कर्मों का कठोर फल भोगना पड़ता है. ऐसे व्यक्ति सांसारिक भोग-विलास में डूबे रहते हैं और मृत्यु के बाद उन्हें कुत्ते की योनि प्राप्त होती है, जहां अपमान और अभाव से भरा जीवन मिलता है.

मित्र के साथ विश्वासघात का फल

मित्रता को सबसे पवित्र संबंध माना गया है, लेकिन जो लोग स्वार्थ के कारण मित्र के साथ धोखा करते हैं, उनके लिए गरुड़ पुराण में कठोर दंड बताया गया है. ऐसे व्यक्ति को अगले जन्म में गिद्ध की योनि मिलती है, जो दूसरों के मृत शरीर पर निर्भर रहता है और लालच व विश्वासघात का प्रतीक माना गया है.

लोगों को धोखा देने वालों का अगला जन्म

गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति झूठ, छल और चालाकी से दूसरों को ठगता है और सच छिपाकर लाभ उठाता है, उसकी आत्मा अधोगति को प्राप्त होती है. ऐसे कर्मों का फल अगले जन्म में उल्लू की योनि के रूप में मिलता है. उल्लू को अज्ञान और भ्रम का प्रतीक माना गया है, क्योंकि वह दिन में छिपा रहता है और रात में सक्रिय होता है.

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