Harsha Richhariya in Mahakumbh: महाकुंभ छोड़कर जा रही हैं हर्षा रिछारिया, जानिए क्यों आहत हैं ग्लैमरस साध्वी?

Harsha Richhariya in Mahakumbh: एक्टर से सनातन धर्म की दीक्षा लेने वाली हर्षा रिछारिया महाकुंभ छोड़कर जा रही हैं. कई साधु-संतों ने उन पर निशाना साधा है. वह लगातार रो रही हैं. हर्षा रिछरिया ने कहा कि मैं बार-बार सफाई दे रही हूं कि मैंने सिर्फ मंत्र दीक्षा ली है. हर्षा ने कहा कि वे सनातन संस्कृति और धर्म की ओर बढ़ रही हैं.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

Harsha Richhariya in Mahakumbh: महाकुंभ में आनंद स्वरूप जी महाराज ने निरंजनी अखाड़े और ग्लैमरस साध्वी हर्षा रिछारिया की आलोचना की, जिसके बाद हर्षा इस कदर आहत हुईं कि उन्होंने महाकुंभ बीच में छोड़ने का फैसला किया. स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज ने कहा था, "महाकुंभ में इस तरह की परंपरा ठीक नहीं है. यह विकृत मानसिकता का नतीजा है. महाकुंभ में चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि दिल की सुंदरता देखनी चाहिए थी."

स्वामी आनंद स्वरूप जी ने इसके साथ ही मॉडल और एक्टर से साध्वी बनी हर्षा रिछारिया और विदेशी महिला लॉरेन पॉवेल पर भी टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा था कि महाकुंभ में धर्म और आध्यात्म पर चर्चा होनी चाहिए. लॉरेन पॉवेल को दीक्षा देना और सनातनी नाम देना सिर्फ प्रचार और मजाक है, क्योंकि वह शुद्धिकरण के बिना महाकुंभ में शामिल हो रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की चीज़ें महाकुंभ को सिर्फ एक मार्केटिंग इवेंट बना देती हैं.

हर्षा रिछारिया ने महाकुंभ छोड़ा

हर्षा रिछारिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्होंने सिर्फ मंत्र दीक्षा ली है, और वे सनातन धर्म की ओर बढ़ रही हैं. हर्षा ने यह भी कहा कि वे एंकरिंग, एक्टिंग और मॉडलिंग से इस क्षेत्र में आईं हैं, तो इसमें गलत क्या है? उन्हें टारगेट किया जा रहा है, जबकि उनके साथ और भी लोग थे जो गृहस्थ थे, लेकिन उन्हें निशाना बनाया गया.

स्वामी आनंद स्वरूप जी की आलोचना से हुईं नाराज!

स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज के बयान के बाद, हर्षा ने आरोप लगाया कि उन्हें महाकुंभ में भाग लेने से रोका जा रहा है और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज को पाप लगेगा.

क्या कारण हैं उनकी नाराजगी के?

इसके अलावा, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी हर्षा रिछारिया पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि जो व्यक्ति संन्यास की दीक्षा या शादी के बीच में है, उसे संत महात्माओं के शाही रथ पर नहीं बिठाना चाहिए था. उन्हें श्रद्धालु के तौर पर भाग लेना चाहिए था, लेकिन भगवा कपड़े पहनकर शाही रथ पर बैठाना गलत है.

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