होली पर है भद्रा का साया, जानिए आपके शहर में आज कब होगा होलिका दहन?

हर साल फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर में सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. इस वर्ष होलिका दहन के दिन विशेष रूप से भद्रा का साया रहेगा. होलिका दहन के दौरान भद्रा का समय वैदिक पंचांग के अनुसार सुबह 10:35 से रात 11:26 तक रहेगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक होता है. होलिका दहन से पहले महिलाएं घर में सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. इस दिन का महत्व इस बात से जुड़ा है कि शुभ मुहूर्त में होलिका पूजा और दहन करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं. पूजा के दौरान महिलाएं होलिका के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं. इस वर्ष होलिका दहन के दिन विशेष रूप से भद्रा का साया रहेगा.

होलिका दहन के दौरान भद्रा का समय वैदिक पंचांग के अनुसार सुबह 10:35 से रात 11:26 तक रहेगा. इस समय के दौरान होलिका दहन नहीं करना चाहिए. भद्रा समाप्त होने के बाद, रात 11:30 बजे से होलिका दहन किया जा सकेगा.

यहां विभिन्न शहरों में होलिका दहन के समय की जानकारी दी गई है:

  • नई दिल्ली: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:30 तक
  • नोएडा: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:29 तक
  • गुरुग्राम: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:31 तक
  • मथुरा: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:28 तक
  • फरीदाबाद: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:30 तक
  • हरिद्वार: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:26 तक
  • कानपुर: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:44 तक
  • चंडीगढ़: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:32 तक
  • मुंबई: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:48 तक
  • पुणे: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:44 तक
  • कोलकाता: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:46 तक
  • हैदराबाद: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:25 तक
  • अहमदाबाद: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:49 तक
  • चेन्नई: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:18 तक
  • जयपुर: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:36 तक
  • बेंगलुरु: रात 11:26 से 14 मार्च सुबह 12:29 तक

होलिका दहन का धार्मिक महत्व पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. इसमें बताया गया है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जल सकती थी. उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई. इस दिन परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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