आखिर क्यों गणेश जी की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए? जानिए विस्तार से

कुछ लोग इसके बारे में एक विशेष मान्यता रखते हैं कि उन्हें गणेश की पीठ का दर्शन नहीं करना चाहिए. इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं-

Poonam Chaudhary

गणेश चतुर्थी पर, हिंदू धर्म के अनुयायों के लिए ''भगवान गणेश का पीठ पर दर्शन करना'' ("Seeing Lord Ganesha on the Peeth") बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन कुछ लोग इसके बारे में एक विशेष मान्यता रखते हैं कि उन्हें गणेश की पीठ का दर्शन नहीं करना चाहिए. इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं, जो कि व्यक्ति की विशेष आस्था, अनुभव, दार्शनिक या परंपरागत मान्यताओं के आधार पर हो सकते हैं. तो चलिए जानते हैं आखिर भगवान गणेश की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहते हैं:

विस्तार से जानें- 

भगवान गणेश को 'रिद्धी- सिद्धी' ('Riddhi-Siddhi') का दाता माना जाता है, सभी देवताओं में से सबसे पहले 'भगवान गणेश' को ही पूजा जाता है. ऐसा माना गया है कि गणेश जी के शरीर पर जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े अंग का निवास है, जैसे- गणेश जी के कानों पर ऋचांए, उनके सूंड पर धर्म, दांए हाथ में वर, बांए में अन्न, आखों में लक्ष्य, पेट में समृद्धि, नाभि में ब्रह्मांड और पैरों में सातों लोक और मस्तक में ब्रह्मलोक विद्यमान है. 

गणेश जी के सामने से दर्शन करने से भक्त को सुख - शांति और समृद्धि प्राप्त होती है लेकिन ऐसा कहा गया है कि उनके पीठ के दर्शन करने से दरिद्रता आती है. वहीं इसके अलावा ऐसी कई बातें हैं जो इस विषय के बारे में कहा गया है- 

GOD Ganesh ji
GOD Ganesh ji

1. यह स्थान विचित्र या भयंकर हो सकता है-
 इसके पीछे व्यक्ति की आस्था या भय हो सकता है कि गणेश की पीठ में किसी अनूठे या डरावने दृश्य से उन्हें डर लग सकता है. 

2. अनुभव के आधार पर-
 कुछ लोगों को पीठ के दर्शन करने से उन्हें अनांद नहीं मिलता है या वे खुद को असहज महसूस करते हैं. वे मानते हैं कि गणपति को खुद के द्वारा किसी विशेष तरीके से उसे प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है और आसाने वाले और आसान ढंग से उन्हें प्रतिष्ठित करना और पूजा करना चाहिए. 

lord ganesha
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3. आस्था के साथ संबंधित-
 गणेश की पीठ शक्तिशाली मानी जाती है और इसे इस्तेमाल करके उसी शक्ति को अभिव्यक्त करने की कोशिश की जाती है. कुछ लोग मानते हैं कि चंडी, काली, दुर्गा जैसे देवी देवताओं के दर्शन करना उनकी धार्मिक आस्था और नीति के खिलाफ हो सकता है.

यदि आपकी किसी मान्यता, अनुभव, आस्था या विश्वास के आधार पर आपको लगता है कि आपको गणेश की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए, तो यह व्यक्तिगत निर्णय है और आपका अधिकार है। धर्म के मामलों में व्यक्ति के आपसी संबंधों, आस्था और विश्वास का महत्व होता है, और हर किसी का अपना मार्ग होता है.


 

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