चैत्र नवरात्रि 19 या 20 मार्च? अमावस्या का प्रभाव, जानें पूजा और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार चैत्र नवरात्रि और चैत्र अमावस्या को लेकर लोगों में जमकर कंफ्यूजन मचा हुआ है. कलश स्थापना कब करें? अमावस्या का दान-पुण्य किस दिन? सबके मन में यही सवाल घूम रहा है. तो आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि व्रत की सही तिथियां और खास बातें.

चैत्र नवरात्रि और चैत्र अमावस्या को लेकर इस बार भक्तों में काफी कंफ्यूजन है, क्योंकि तिथियों का निर्धारण और शुभ मुहूर्त को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. लोग यह जानना चाहते हैं कि कलश स्थापना कब करें, दान-पुण्य और पितर तर्पण किस दिन उत्तम रहेगा, तथा नवरात्रि व्रत की शुरुआत कब से मानी जाए. पंचांग और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार स्पष्ट तिथियां तय हो चुकी हैं, जिससे भक्तों की दुविधा दूर हो सकती है.
वैदिक पंचांग के मुताबिक चैत्र अमावस्या और नवरात्रि की शुरुआत अलग-अलग दिनों पर पड़ रही है, जबकि उदया तिथि और व्याप्ति के आधार पर निर्णय लिया जाता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि किन तारीखों पर क्या अनुष्ठान शुभ रहेगा.
चैत्र अमावस्या और चैत्र नवरात्रि की तिथियां
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे शुरू हो रही है और 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी. इसलिए दर्श अमावस्या और पितर तर्पण आदि कार्य मुख्य रूप से 18 मार्च (बुधवार) को ही किए जाएंगे.
19 मार्च को अमावस्या तिथि प्रातः 6:40 बजे तक रहेगी, लेकिन इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी. पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 18 मार्च को दिन में 7:39 बजे तक रहेगी, उसके बाद अमावस्या लग जाएगी जो 19 मार्च प्रातः 6:40 बजे तक व्याप्त रहेगी. अमावस्या तिथि का अधिकांश समय 18 मार्च को ही प्राप्त हो रहा है. हालांकि उदय काल में यह 19 मार्च को है, इसलिए स्नान आदि 19 मार्च प्रातः किया जा सकता है, लेकिन श्राद्ध कर्म और पितर तर्पण के लिए 18 मार्च उत्तम रहेगा.
19 मार्च (गुरुवार) को प्रातः 6:40 बजे के बाद चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शुरू हो जाएगी, जिससे चैत्र नवरात्रि का आरंभ होगा. इसी दिन हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ हो जाएगा.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6:41 बजे से सूर्यास्त से पहले तक रहेगा. ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष देवी का आगमन डोली से हो रहा है, जबकि गमन हाथी से होगा, जो अत्यंत लाभकारी माना जाता है.चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी दिन देवी आदिशक्ति ने सृष्टि का आरंभ किया था. शास्त्रों में कहा गया है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था. इसी से हिंदी नववर्ष का शुभारंभ होता है.
सूर्य उपासना का महापर्व चैती कब से शुरू
22 मार्च से चार दिवसीय सूर्य उपासना का महापर्व चैती भी आरंभ हो रहा है. 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ चैती छठ शुरू होगी. 23 मार्च को खरना पूजन, 24 मार्च को सांयकालीन अर्घ्य और 25 मार्च की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती उपवास तोड़ेंगे और पारण करेंगे.
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.


