197 स्ट्राइक रेट से मचाया कोहराम! ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड बना चैंपियन, अब टीम इंडिया में एंट्री पक्की?

भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन की कप्तानी में झारखंड पहली बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में चैंपियन बना. ऐसे में सवाल आ रहे हैं कि क्या ईशान किशन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करेंगे या नहीं ?

Sonee Srivastav

क्रिकेट की दुनिया में वापसी हमेशा मुश्किल होती है, खासकर जब आप टीम के मुख्य खिलाड़ी रहे हों और अचानक बाहर हो जाएं. भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन के साथ भी यही हुआ. 2023 के अंत में निजी कारणों से  उन्होंने ब्रेक लिया, फिर सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट चला गया. एक समय वह सफेद गेंद के क्रिकेट में ऋषभ पंत के बाद पहली पसंद थे, लेकिन सब कुछ बदल गया. 

लंबी खामोशी और घरेलू मैदान

ब्रेक के बाद ईशान चुप हो गए. कोई बयान नहीं, कोई बहाना नहीं. सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलते रहे. रणजी, विजय हजारे और अन्य टूर्नामेंट में रन बनाते रहे, लेकिन टीम इंडिया की नजर से दूर हो गए. लोग सोचने लगे कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो गया. चयनकर्ता नए खिलाड़ियों की ओर बढ़ चुके थे. इस दौरान ईशान ने खुद को मजबूत बनाया. तकनीक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी तैयार वे हुए. 

सैयद मुश्ताक अली में धमाकेदार वापसी

दिसंबर 2025 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी ने सब बदल दिया. ईशान ने झारखंड की कप्तानी की और टीम को पहला खिताब दिलाया. सबसे ज्यादा रन बनाए, स्ट्राइक रेट 197 से ऊपर रहा. हर मैच में आक्रामक बल्लेबाजी की. यह सिर्फ रन नहीं थे, बल्कि उनका जवाब था उन लोगों को जो उन्हें भूल चुके थे. कप्तान के रूप में साहसी फैसले लिए, खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आजादी दी. 

मानसिक मजबूती की मिसाल

ईशान की यह वापसी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने हार नहीं मानी. असफलता से डरे नहीं, बल्कि उसका सामना किया. घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा खेल दिखाया. उनके कोच और साथी कहते हैं कि अब वह पहले से ज्यादा परिपक्व हैं. जीवन की मुश्किलों ने उन्हें सिखाया कि दबाव में कैसे खड़ा रहना है. IPL की चर्चाओं के बीच उन्होंने घरेलू क्रिकेट चुना और साबित किया कि वह अभी भी तैयार हैं.

टीम इंडिया में जगह की उम्मीद

अब सवाल यह है कि क्या टीम इंडिया उन्हें स्थायी जगह देगी? सफेद गेंद के क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज की जरूरत है. ईशान की फॉर्म देखकर चयनकर्ता सोच रहे होंगे. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और कप्तानी का अनुभव टीम को फायदा दे सकता है.

यह वापसी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए संदेश है कि प्रतिभा को मौका मिलना चाहिए. ईशान की कहानी सिखाती है कि खामोशी में भी मेहनत जारी रखो, तो एक दिन बल्ला जरूर बोलेगा. 

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