ईशान किशन की तूफानी पारी ने जिताया मैच, पर कप्तान को क्यों आई झुंझलाहट
रायपुर टी20 में भारत ने रिकॉर्ड तेजी से लक्ष्य पाया। ईशान किशन की आंधी ने मैच पलट दिया। मगर इसी आंधी के बीच कप्तान सूर्यकुमार यादव के मन में एक हल्की नाराजगी भी उभरी।

रायपुर के मैदान पर मैच शुरू होते ही भारत को झटका लगा। दोनों ओपनर सिर्फ छह रन पर आउट हो गए। स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। रन चेज कठिन लगने लगा। तभी क्रीज पर आए Ishan Kishan। उन्होंने हालात पढ़े। डर की जगह आक्रामकता चुनी। पहली ही ओवर से शॉट्स निकलने लगे। न्यूजीलैंड के गेंदबाज दबाव में आए। मैच की दिशा यहीं से बदली।
किशन ने क्यों बदला माहौल?
ईशान ने गेंद को देखा नहीं, बल्कि मारा। चौके जमीन पर गिरे। छक्के हवा में उड़े। पावरप्ले में रन तेजी से आए। सिर्फ 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा हुआ। भारतीय डगआउट में ऊर्जा लौट आई। कीवी कप्तान के चेहरे पर चिंता दिखी। फील्ड बदली गई। मगर असर नहीं पड़ा। ईशान लगातार स्ट्राइक लेते रहे। स्कोरबोर्ड तेजी से भागने लगा।
साझेदारी में क्या खास रहा?
कप्तान Suryakumar Yadav दूसरे छोर पर टिके थे। दोनों के बीच साझेदारी बढ़ती गई। सिर्फ 43 गेंदों में 100 रन जुड़ गए। सुनने में यह सामान्य लगता है। मगर अंदर की कहानी अलग थी। 31 गेंदें ईशान ने खेलीं। 76 रन अकेले उन्होंने जोड़े। सूर्या को कम गेंदें मिलीं। साझेदारी एकतरफा हो गई।
कप्तान को गुस्सा क्यों आया?
मैदान पर सूर्या मुस्कुरा रहे थे। मगर भीतर हल्की झुंझलाहट थी। वजह साफ थी। स्ट्राइक बार-बार ईशान के पास जा रही थी। कप्तान रन बनाना चाहते थे। लय पकड़ना चाहते थे। मगर गेंद मिल ही नहीं रही थी। पावरप्ले निकलता जा रहा था। सूर्या नॉन-स्ट्राइक पर खड़े देख रहे थे। यह गुस्सा नाराजगी नहीं, एक बल्लेबाज की बेचैनी थी।
आउट होने का पल क्या बोला?
दसवें ओवर की पहली गेंद आई। ईशान ने फिर बड़ा शॉट चुना। ईश सोढ़ी की गेंद पर छक्का मारना चाहा। टाइमिंग चूक गई। गेंद हवा में गई। कैच हो गया। 32 गेंदों पर 76 रन की पारी खत्म हुई। स्टेडियम तालियों से गूंजा। भारत जीत की पटरी पर था। ईशान का काम पूरा हो चुका था।
मैच बाद कप्तान ने क्या कहा?
मैच खत्म होने के बाद सूर्या ने सच बताया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उन्हें गुस्सा आ रहा था। वजह वही स्ट्राइक न मिलना था। साथ ही उन्होंने ईशान की तारीफ की। कहा कि हालात समझना जरूरी था। टीम आगे बढ़ रही थी। नेट्स में मेहनत काम आई। प्रैक्टिस का फायदा मिला। कप्तान की बात में हल्कापन था। संदेश साफ था।
इस पारी का मतलब क्या?
यह पारी सिर्फ रन नहीं थी। यह संदेश थी। टीम में आत्मविश्वास लौट आया। भारत ने 209 रन का लक्ष्य 92 गेंदों में पा लिया। सीरीज में 2-0 की बढ़त मिली। ईशान ने दिखाया कि दबाव में कैसे खेलते हैं। सूर्या ने दिखाया कि कप्तान कैसे सोचता है। जीत के बीच की यह कहानी क्रिकेट को खूबसूरत बनाती है।


