नोएडा अथॉरिटी के नए CEO बने कृष्णा करुणेश, जल्द संभालेंगे कार्यभार
नोएडा में गड्ढे में डूबकर इंजीनियर की मौत के बाद सीईओ लोकेश एम को हटाकर 2011 बैच के आईएएस कृष्णा करुणेश को नोएडा अथॉरिटी का नया सीईओ बनाया गया है.

नोएडा में सड़क पर बने पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. इस गंभीर घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को पद से हटा दिया गया. उनकी जगह अब 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश नोएडा प्राधिकरण की कमान संभालेंगे.
प्रतीक्षा सूची में लोकेश एम
हटाए गए सीईओ लोकेश एम को फिलहाल प्रतीक्षा सूची में रखा गया है. उन्हें जुलाई 2023 में नोएडा अथॉरिटी के सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. आईएएस कृष्णा करुणेश इससे पहले नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) के तौर पर कार्यरत थे. ऐसे समय में उन्हें सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब प्राधिकरण और जिला प्रशासन इंजीनियर की मौत को लेकर सवालों के घेरे में है. यह नियुक्ति सरकार की ओर से जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार के संकेत के रूप में देखी जा रही है.
कृष्णा करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और 2011 बैच के तेज-तर्रार आईएएस अधिकारियों में उनकी गिनती होती है. उन्होंने एमए और एलएलबी की पढ़ाई की है. अपने प्रशासनिक करियर में वह कई अहम पदों पर रह चुके हैं. गाजियाबाद में एसडीएम और सीडीओ के रूप में सेवाएं देने के अलावा वह हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी भी रह चुके हैं. इसके साथ ही कुशीनगर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और गोरखपुर में जिलाधिकारी के तौर पर भी उन्होंने कार्य किया है.
गोरखपुर में डीएम रहते हुए कृष्णा करुणेश ने सख्त प्रशासनिक रवैये, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए अलग पहचान बनाई थी. यही कारण है कि सरकार ने उन्हें नोएडा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर की जिम्मेदारी सौंपी है.
युवराज की मौत से योगी आदित्यनाथ सरकार सख्त
उधर, योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है. घटना के विरोध में लोगों द्वारा मार्च निकाले जाने के बाद सरकार ने सीईओ को हटाने का फैसला किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं. इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है, जिसे पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. साथ ही, लापरवाही के आरोप में तीन बिल्डरों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है.
गौरतलब है कि बीते रविवार को इंजीनियर युवराज मेहता की कार नोएडा में सड़क पर बने पानी भरे गड्ढे में गिर गई थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना ने शहर की आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


