हिमाचल प्रदेश में रैगिंग और यौन उत्पीड़न से परेशान छात्रा की मौत, प्रोफेसर समेत तीन छात्राओं पर लगाए आरोप

धर्मशाला के एक सरकारी कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा की मौत के बाद रैगिंग और यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं. मौत से पहले रिकॉर्ड वीडियो ने मामले को गंभीर बना दिया, पुलिस जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

धर्मशालाः हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित एक सरकारी डिग्री कॉलेज से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कॉलेज में पढ़ने वाली द्वितीय वर्ष की एक छात्रा की मौत के बाद तीन छात्राओं और एक प्रोफेसर पर रैगिंग और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस मामले ने पूरे राज्य में आक्रोश और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है.

मौत से पहले छात्रा ने रिकॉर्ड किया वीडियो

मृत छात्रा ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन पर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने अपने साथ हुई कथित प्रताड़ना की पूरी कहानी बयां की. वीडियो में छात्रा ने आरोप लगाया कि कॉलेज के एक प्रोफेसर ने उसके साथ गलत तरीके से छुआ और उसे मानसिक व यौन रूप से परेशान किया. छात्रा ने यह भी बताया कि जब उसने इस व्यवहार का विरोध किया तो उसे चुप रहने की धमकियां दी गईं.

रैगिंग के आरोप में तीन छात्राएं नामजद

छात्रा के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 18 सितंबर को कॉलेज की तीन छात्राओं हर्षिता, आकृति और कोमोलिका ने कथित तौर पर उसकी बेटी के साथ क्रूर रैगिंग की. आरोप है कि रैगिंग के दौरान छात्रा के साथ मारपीट की गई और उसे डराया-धमकाया गया ताकि वह किसी को इस बारे में न बता सके. पिता का कहना है कि इन घटनाओं के बाद उनकी बेटी पूरी तरह टूट गई थी.

प्रोफेसर पर गंभीर आरोप

शिकायत में कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार का नाम भी आरोपी के रूप में शामिल किया गया है. पिता ने बताया कि प्रोफेसर के कथित अभद्र व्यवहार और लगातार मानसिक दबाव के कारण उनकी बेटी गहरे तनाव में थी. इसी तनाव की वजह से उसकी शारीरिक और मानसिक हालत लगातार बिगड़ती चली गई.

इलाज के दौरान हुई मौत

परिवार के अनुसार, छात्रा को मौत से पहले कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया था. अंत में उसे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई. परिवार का कहना है कि बेटी की मौत के सदमे में होने के कारण वे तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करा सके.

पहले भी की गई थी शिकायत

छात्रा के पिता ने बताया कि 20 दिसंबर को उन्होंने पुलिस और मुख्यमंत्री की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. बेटी की मौत के बाद जब वीडियो सामने आया, तब परिवार ने पूरे मामले को औपचारिक रूप से उठाने का फैसला किया.

पुलिस जांच का दायरा बढ़ा

पुलिस अधिकारी अशोक रतन ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 के तहत केस दर्ज किया गया है. पहले शिकायत में केवल रैगिंग का जिक्र था, लेकिन प्रोफेसर पर लगे आरोपों के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. पुलिस अब उन सभी अस्पतालों की भी जांच करेगी, जहां छात्रा को भर्ती कराया गया था.

कॉलेज प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

कॉलेज प्रशासन ने इस पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए कहा है कि छात्रा पहले वर्ष में फेल हो गई थी और इसके बावजूद दूसरे वर्ष में दाखिला लेने की कोशिश कर रही थी. कॉलेज के प्रिंसिपल राकेश पठानिया ने दावा किया कि छात्रा या उसके परिवार की ओर से पहले कभी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी.

सवालों के घेरे में व्यवस्था

यह मामला न सिर्फ एक छात्रा की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि कॉलेज परिसरों में सुरक्षा, शिकायत तंत्र और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सच सामने आता है और दोषियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है.

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