AAP नेता राघव चड्डा बने डिलीवरी बॉय! पहनी यूनिफॉर्म, कड़कड़ाती ठंड में घर-घर जाकर पहुंचाया सामान, देखें Video
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की हकीकत समझने के लिए Blinkit डिलीवरी पार्टनर बनकर काम किया. उन्होंने यह अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया और गिग इकॉनमी में काम करने वालों की समस्याओं, असुरक्षा और दबावों को उजागर किया.

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों अपने एक अलग तरह के प्रयोग को लेकर सुर्खियों में हैं. इस बार वजह कोई सियासी बयान नहीं, बल्कि उनका जमीनी स्तर पर किया गया एक अनुभव है. उन्होंने कुछ समय के लिए खुद को एक Blinkit डिलीवरी पार्टनर की भूमिका में रखकर काम किया, जो आमतौर पर नेताओं से देखने को नहीं मिलता.
सोशल मीडिया पर शेयर किया अनुभव
Away from boardrooms, at the grassroots. I lived their day.
Stay tuned! pic.twitter.com/exGBNFGD3T— Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 12, 2026
क्यों चुना डिलीवरी पार्टनर की भूमिका
दरअसल, वीडियो के अंतिम हिस्से में राघव चड्ढा एक अपार्टमेंट के दरवाजे पर डिलीवरी देते दिखाई देते हैं. यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब वे लगातार गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों की स्थिति को लेकर आवाज उठा रहे हैं. कुछ समय पहले उन्होंने गिग वर्कर्स की कठिन जिंदगी, असमानताओं और दबावों को लेकर सोशल मीडिया पर विस्तार से लिखा था. उनका कहना है कि बड़ी कंपनियां इन कामगारों पर निर्भर तो हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और अधिकार नहीं मिल पाते.
गिग वर्कर्स पर सरकार का नया कदम
इसी बीच सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक अहम पहल की है. 30 दिसंबर 2025 को कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 के तहत नए ड्राफ्ट नियम जारी किए गए, जिनका उद्देश्य इन कामगारों को औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा देना है. राघव चड्ढा ने इन नियमों का स्वागत करते हुए कहा कि यह करोड़ों डिलीवरी पार्टनर्स और फ्रीलांस वर्कर्स के लिए एक सकारात्मक शुरुआत है. उनके अनुसार, यह कदम सम्मान, अधिकार और सुरक्षा की दिशा में जरूरी पहल है.
“अब तक नजरअंदाज होती रही हैं समस्याएं”
चड्ढा का मानना है कि लंबे समय तक कई प्लेटफॉर्म कंपनियां गिग वर्कर्स की समस्याओं को नजरअंदाज करती रही हैं. हालांकि, नए नियमों से उम्मीद जगी है कि भविष्य में इन कामगारों को बीमा, पेंशन, हेल्थ कवर और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं.
डिलीवरी पार्टनर को घर बुलाकर की बातचीत
सिर्फ वीडियो तक सीमित न रहते हुए, राघव चड्ढा ने निजी स्तर पर भी इस मुद्दे को समझने की कोशिश की. संसद सत्र समाप्त होने के बाद उन्होंने एक डिलीवरी पार्टनर को अपने घर लंच पर बुलाया. यह मुलाकात पूरी तरह अनौपचारिक और सहज रही, जहां दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया और खुलकर बातचीत की.
गिग वर्कर की रोजमर्रा की चुनौतियां
इस बातचीत में डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि लंबे समय तक काम करना पड़ता है और रोज की कमाई तय नहीं होती. एल्गोरिदम आधारित टारगेट पूरे करने का दबाव बना रहता है. टारगेट पूरे न होने पर इंसेंटिव कट जाता है और कभी-कभी अकाउंट सस्पेंड होने का खतरा भी रहता है. दुर्घटना, बीमारी या ग्राहक से विवाद की स्थिति में मदद की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती.
नीति को जमीन पर समझने की कोशिश
राघव चड्ढा ने इन बातों को गंभीरता से सुना और माना कि देश की अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी सुरक्षा अब भी कमजोर है. उनका कहना है कि जो लोग दिनभर सड़कों पर रहकर जरूरी सामान पहुंचाते हैं, उनके लिए कम से कम बुनियादी सुरक्षा और स्थिरता जरूरी है.
लोगों ने इस कदम को सराहा है
Blinkit डिलीवरी एजेंट बनकर काम करना और सीधे एक वर्कर से संवाद करना, चड्ढा की उसी सोच का हिस्सा है, जिसमें वे नीतियों को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं देखना चाहते. सोशल मीडिया पर उनके इस कदम को कई लोगों ने सराहा है और इसे जमीनी हकीकत से जुड़ने की एक सकारात्मक पहल बताया है.


