सारे डॉक्यूमेंट दिए थे, लेकिन मेरे पूरे परिवार का नाम UP SIR में नहीं, कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह का बड़ा दावा

कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने उत्तर प्रदेश की एसआईआर मसौदा सूची में अपने और परिवार के नाम गायब होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं.सप्पल ने इसे एसआईआर प्रणाली की गंभीर कमी बताया और निर्वाचन आयोग से सभी वैध मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की अपील की.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

उत्तर प्रदेश : कांग्रेस नेता और कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मसौदा सूची में अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम गायब होने का दावा किया है. सप्पल ने कहा कि उनके पास सारे प्रमाणिक दस्तावेज हैं और उनके नाम 2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज थे. इसके बावजूद उनका नाम इस बार मसौदा सूची से हटा दिया गया.

स्थानांतरण को कारण बताया गया

आपको बता दें कि सप्पल के अनुसार, उनके नाम कटने का मुख्य कारण यह था कि उन्होंने अपना घर साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित किया था. उन्हें बताया गया कि एसआईआर में स्थानांतरित मतदाताओं का नाम बनाए रखने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. इसके चलते उन्होंने अपने नाम और परिवार के सदस्यों के नाम हटाए जाने की शिकायत की.

सत्यापित दस्तावेजों के बावजूद कटौती
सप्पल ने कहा कि उन्होंने निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे. इनमें पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, बैंक खाता, प्रॉपर्टी दस्तावेज और दसवीं कक्षा के प्रमाणपत्र शामिल थे. इसके बावजूद उनका नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं किया गया.

पूर्व उपराष्ट्रपति के साथ ही साथ अन्य पदों पर रह चुका हूं 
सप्पल ने यह भी बताया कि वे भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के साथ और राज्य सभा सचिवालय में संयुक्त सचिव रह चुके हैं. इसके अलावा वे कांग्रेस की सर्वोच्च समिति के सदस्य भी हैं और एसआईआर और अन्य निर्वाचन मामलों पर निर्वाचन आयोग में कई बार कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं.

SIR की व्यापक समस्या पर चिंता
सप्पल ने कहा कि उनके जैसे कई करोड़ वास्तविक मतदाता हैं, जिनका नाम स्थानांतरण के कारण कट गया. उन्होंने चिंता जताई कि जबकि वे नए फॉर्म 6 भरकर अपने नाम को पुनः सूची में जोड़ सकते हैं, लेकिन आम मतदाता शायद ऐसा करने में सक्षम नहीं होंगे. उन्होंने इसे एसआईआर की वास्तविकता बताते हुए बताया कि यह प्रणाली कई मतदाताओं के लिए समस्याएँ उत्पन्न कर रही है.

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रभाव
सप्पल ने इस घटना को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थानांतरण और अन्य प्रक्रियाओं के कारण किसी भी वैध मतदाता का नाम हटाया न जाए, ताकि सभी नागरिकों को उनके मत देने के अधिकार का संरक्षण मिल सके.

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