मुकुटमणि और संत कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने दिए गिरफ्तारी के आदेश

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में धार्मिक कथा के दौरान कथावाचकों द्वारा फर्जी आधार कार्ड के इस्तेमाल के मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. एडीजे-7 राखी चौहान की अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और पुलिस को आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दांदरपुर गांव में आयोजित धार्मिक कथा के दौरान कथावाचक मुकुट मणि यादव और संत प्रसाद की अग्रिम जमानत याचिका बुधवार को एडीजे‑7 राखी चौहान की अदालत ने खारिज कर दी. आरोप है कि कथावाचकों ने कथानक में अपनी जाति छिपाई और फर्जी आधार कार्ड बनवाकर आर्थिक लाभ अर्जित करने की कोशिश की, जिसके चलते गांव में तनाव फैल गया.

मामले का पूरा ट्रैक-record

कथा आयोजन: 21 जून को महेवा ब्लॉक के दांदरपुर गांव में धार्मिक कथा का आयोजन हुआ, जिसमें कथावाचकों द्वारा कथानक प्रस्तुत किया गया.

विवाद का जन्म: गांव वालों की शिकायत थी कि कथावाचकों ने अपनी जाति छिपाई और कथानक में झूठा विवरण प्रस्तुत किया. लोगों ने कथावाचकों के साथ मारपीट की और उनका सिर मुंडवा दिया.

FIR दर्ज: इस घटना के बाद कथावाचकों ने गांव के दो नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला और अपमानजनक व्यवहार की रिपोर्ट दर्ज कराई. वहीं, मुख्य यजमान ने कथावाचकों पर फर्जी जाति घोषित कर धार्मिक भावनाएं आहत करने व समाज में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.

प्रतिस्पर्धी सतह पर जांच और स्थलांतरण

इटावा के एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव की सिफारिश पर जांच को पारदर्शी बनाने हेतु यह मामला झांसी भेजा गया, जहाँ थाना प्रभारी जेपी पाल द्वारा इसकी जांच की जा रही है.

आधार-पत्र की जांच

एडीजीसी अजीत तोमर ने अदालत में आधार कार्ड की जांच रिपोर्ट पेश की.

जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कथावाचक मुकुट मणि यादव के नाम पर दो अलग‑अलग आधार कार्ड थे—जिसमें से एक में जाति “अग्निहोत्री” दर्ज थी.

इस तथ्य को कोर्ट ने गंभीरता से लिया, क्योंकि कथावाचकों पर धार्मिक आयोजन में लाभ उठाने के लिए फर्जी जाति का प्रयोग करने का आरोप था, जिससे सामाजिक Harm (तनाव) उत्पन्न हुआ.

अग्रिम जमानत आवेदन खारिज

अदालत ने कथित फर्जी दस्तावेजों और जांच में सहयोग न करने को गंभीर मानते हुए अग्रिम जमानत याचिका को ठुकरा दिया. कोर्ट की नाराज़गी जताते हुए एडीजीसी अजीत तोमर ने कहा कि कथावाचकों को विवेचना में सहयोग न करने के कारण कड़ी चेतावनी दी गई है और पुलिस को शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश भी दिए गए हैं.

आगे की कार्यवाही और वकीलों की रणनीति

कथावाचकों के वकील मनोज शाक्य और योगेश राजू यादव ने बताया कि वे उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे. दूसरी तरफ, पुलिस आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश जारी रखे हुए हैं.

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