बिहार विधानसभा में नए नेतृत्व की नियुक्ति, सदन के नेता घोषित किए गए CM नीतीश और नेता प्रतिपक्ष घोषित हुए तेजस्वी

बिहार विधानसभा के हालिया सत्र में नीतीश कुमार को सदन का नेता और तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया गया. 18वीं विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ, जिसमें प्रेम कुमार को अध्यक्ष चुना गया. हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बिहार : बिहार विधानसभा के हालिया सत्र में राजनीतिक माहौल ने राज्य की नई राजनीतिक दिशा को स्पष्ट कर दिया है. विधानसभा में नीतीश कुमार को सदन का नेता घोषित किया गया है, जबकि तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष का पद सौंपा गया. हालांकि, तेजस्वी यादव इस सत्र में उपस्थित नहीं थे क्योंकि वह मंगलवार को दिल्ली चले गए थे. उनकी गैरमौजूदगी सदन में चर्चा का विषय बनी रही, लेकिन विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने की उम्मीद जताई गई.

18वीं विधानसभा का पहला सत्र 

आपको बता दें कि हाल ही में बिहार की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ. इस अवसर पर सभी विधायकों ने शपथ ली और विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ. विधानसभा अध्यक्ष के रूप में बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार को सर्वसम्मति से चुना गया. इस मौके पर तेजस्वी यादव ने अपनी उम्मीद जताई कि नया अध्यक्ष सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान अवसर देंगे और विधानसभा की कार्यवाही निष्पक्ष ढंग से संचालित होगी.

बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव परिणाम 
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत प्राप्त हुआ. एनडीए को कुल 202 सीटें मिलीं जबकि महागठबंधन केवल 35 सीटों पर सिमट गया. पार्टीवार देखें तो बीजेपी को 89 सीटें, जेडीयू को 85 सीटें, आरजेडी को 25 सीटें, एलजेपी को 19 सीटें, कांग्रेस को 6 सीटें, एआईएमआईएम को 5 सीटें और हम को 5 सीटें मिलीं. बाकी 9 सीटें अन्य छोटे दलों और निर्दलियों के खाते में गईं. नई पार्टी जनसुराज का खाता नहीं खुल सका और इसके लीडर प्रशांत किशोर को राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा.

नई कैबिनेट में कुल 26 मंत्री शामिल 
चुनावों के परिणामों के बाद नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया. डिप्टी सीएम पद विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को सौंपा गया. नीतीश कुमार की कैबिनेट में कुल 26 मंत्रियों को शामिल किया गया, जिसमें बीजेपी के 14 मंत्री, जेडीयू के 8 मंत्री, एलजेपी के 2 मंत्री, हम के एक और आरएमएल के एक मंत्री शामिल हैं. इस कैबिनेट गठन से राज्य में सत्ता संतुलन और गठबंधन की मजबूती को दर्शाया गया.

बिहार विधानसभा का यह सत्र राज्य की नई राजनीतिक दिशा, सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन, और आगामी नीतिगत निर्णयों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा. नए नेतृत्व और कैबिनेट गठन के साथ, बिहार में नीति निर्माण और कार्यवाही की गति बढ़ने की संभावना है.

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