मेयर पद से दूर हुई BJP!...कल्याण-डोंबिवली में राजनीति का नया मोड़, पुरानी दुश्मनी भुलकर साथ आए एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे

कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 50 सीटें जीतीं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 53 और मनसे को 5 सीटें मिलीं. बहुमत के लिए 62 सीटें जरूरी हैं. वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने राज ठाकरे की मनसे के साथ गठबंधन कर बीजेपी को मेयर पद से दूर रखने की रणनीति बना ली है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति अक्सर अप्रत्याशित मोड़ लेती है, और नगर निगम चुनावों के बाद यह बात फिर स्पष्ट हो गई है. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में हाल ही में हुए चुनावों के परिणामों ने राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर को और जटिल बना दिया है. इसी क्रम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने राज ठाकरे की मनसे के साथ अपनी पुरानी दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए गठबंधन किया, जिसका उद्देश्य बीजेपी को मेयर पद से दूर रखना बताया जा रहा है.

बीजेपी का मजबूत प्रदर्शन, फिर भी बहुमत नहीं

आपको बता दें कि KDMC के 122 सदस्यों वाले निगम में बीजेपी ने 50 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें मिलीं. मनसे ने 5 सीटें हासिल कीं और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना 11 सीटों पर सिमट गई. सत्ता बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 62 सीटों की आवश्यकता है, इसलिए किसी भी दल के लिए अकेले बहुमत बनाना संभव नहीं हुआ.

महायुति में दरार: मेयर पद पर टकराव
हालांकि महायुति का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना और बीजेपी कल्याण-डोंबिवली में मेयर पद को लेकर आमने-सामने आ गए हैं. दोनों ही पक्ष अपने-अपने एजेंडे पर कायम हैं. बीजेपी 2.5 साल के रोटेशन में मेयर पद साझा करने की मांग कर रही है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना पूरे कार्यकाल के लिए मेयर पद अपने पास रखना चाहती है.

मनसे के साथ गठबंधन से बढ़ा दबाव
कोंकण भवन में हुई हाई-लेवल बैठक के बाद शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने मनसे के साथ गठबंधन की पुष्टि की. इस गठबंधन के साथ कुल सीटें 58 तक पहुंच गईं, जो बहुमत से केवल चार सीट कम है. श्रीकांत ने संकेत दिया कि उद्धव गुट के चार पार्षद भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं, जिससे बहुमत हासिल हो सकता है और बीजेपी के साथ सत्ता साझा करने की जरूरत खत्म हो जाएगी.

महाराष्ट्र के अन्य नगर निकायों में भी गठबंधन की राजनीति
यहां का राजनीतिक परिदृश्य केवल कल्याण-डोंबिवली तक सीमित नहीं है. दिसंबर 2025 में हुए अंबरनाथ और अकोला नगर परिषद चुनावों में भी गठबंधन की इसी तरह की राजनीति देखने को मिली थी. अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जबकि अकोला में AIMIM के साथ हाथ मिलाया. बाद में बीजेपी नेतृत्व ने इन गठबंधनों पर सख्ती दिखाई, जबकि कांग्रेस ने अंबरनाथ में अपने 12 पार्षदों को निलंबित भी कर दिया.

BMC में भी मेयर पद को लेकर सस्पेंस
इन सब घटनाओं के बीच मुंबई की बृहन्मुम्बई नगर निगम (BMC) में भी मेयर पद को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. 227 सदस्यीय BMC में महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत प्राप्त किया, लेकिन फिर भी मेयर पद पर सहमति नहीं बन पा रही है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नव निर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया और उन्हें जीत के प्रमाणपत्र मिलने तक वहां रहने को कहा.

महायुति के अंदरूनी मतभेदों का खुलासा
यह हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव महायुति के भीतर चल रहे अंदरूनी संघर्ष और मतभेदों को स्पष्ट रूप से उजागर करता है. पार्टी के भीतर सत्ता और प्रभाव को लेकर टकराव गहराता जा रहा है, और यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की ओर संकेत करती है.

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