इंदौर में सीवर वाला पानी बन गया मौत का कारण, 9 की मौत और 150 से अधिक बीमार
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने कहर ढाया है. पीने के पानी में सीवर जैसे बैक्टीरिया पाए जाने के बाद अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 150 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं. राज्य सरकार ने आपातकालीन राहत और मुफ्त इलाज की घोषणा की है.

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने कहर ढा दिया है. अधिकारियों के अनुसार, पीने के पानी में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं जो सामान्यतः सीवर के पानी में होते हैं. इस संक्रमण से अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 150 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं.
स्थानीय निवासियों ने कई दिनों तक पानी की खराब गुणवत्ता की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण हालात बिगड़ते चले गए. अब राज्य सरकार ने आपातकालीन उपायों की घोषणा की है और प्रभावितों के लिए मुफ्त इलाज का भरोसा दिया गया है.
सीवर वाले बैक्टीरिया की पुष्टि, रोगाणु की पहचान अभी बाकी
शुरुआती रिपोर्टों से सीवेज के पानी में असामान्य बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है, जिनमें इंसानी मल से जुड़े बैक्टीरिया भी शामिल हैं. हालांकि, बैक्टीरिया की सही किस्म की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, क्योंकि कल्चर रिपोर्ट अभी आनी बाकी हैं. प्रभावित मरीजों के स्टूल टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और साफ हो जाएगी.अधिकारियों ने बताया कि सीवेज लाइन से पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण संक्रमण फैला होगा. पानी के नमूनों के आगे के परीक्षण चल रहे हैं, ताकि रोगाणु की पहचान और संक्रमण की गंभीरता का पता चल सके.
एनएचआरसी और उच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इंदौर में जल प्रदूषण के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
इसी तरह, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने भी राज्य सरकार से घटना का पूरा विवरण मांगा है. मानवाधिकार संगठन ने बयान में कहा कि "स्थानीय निवासी कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया."
सरकारी राहत और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है. इसके अलावा, सभी प्रभावित मरीजों के लिए मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया गया है.
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सबसे पहले 25 दिसंबर को निवासियों ने पानी में असामान्य गंध की शिकायत की थी. इलाके में बीमार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और अब तक 2,456 लोग उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं, जिनमें 162 को अस्पताल में भर्ती कराया गया.


