Delhi NCR Pollution : दिवाली से पहले दिल्ली-NCR में लागू हुआ GRAP-1, 200 के पार पहुंचा AQI

GRAP stage 1 Delhi : दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले ही वायु गुणवत्ता खराब होने के कारण GRAP स्टेज 1 लागू कर दिया गया है. एक्यूआई 211 तक पहुँच गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है. CAQM के अनुसार आने वाले दिनों में भी यही स्थिति बनी रह सकती है. इसके तहत लकड़ी और कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध, और निर्माण स्थलों पर सख्त निगरानी जैसे कदम उठाए गए हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

GRAP stage 1 Delhi : दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दिवाली से पहले ही वायु गुणवत्ता खराब हो गई है, जिसके कारण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज 1 लागू कर दिया गया है. दिल्ली में 14 अक्टूबर को प्रदूषण स्तर 211 दर्ज हुआ, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. इस स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं ताकि वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके. विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी प्रदूषण स्तर ‘खराब’ श्रेणी में बना रहेगा, इसलिए अब तक की तुलना में अधिक सतर्कता बरतनी होगी.

लकड़ी और कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध 

बता दें कि GRAP के तहत लकड़ी और कूड़ा जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, क्योंकि ये प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत हैं. खुले में कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, इसलिए इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है. साथ ही निर्माण और ध्वस्तीकरण स्थलों पर धूल फैलने से रोकने के लिए एंटी स्मॉग गन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है. 500 वर्गमीटर से बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को अपने डस्ट मैनेजमेंट प्लान का पालन करना होगा, जिससे निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल का फैलाव नियंत्रित रहे. इससे दिल्ली और एनसीआर की हवा को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी.

कोयला और लकड़ी के उपयोग पर पाबंदी
सड़क किनारे फूड स्टॉल और कमर्शियल किचन में अब कोयला और लकड़ी के ईंधन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. इसके बजाय सभी होटलों, रेस्टोरेंट्स और खुले खाने-पीने के स्थानों को बिजली, गैस या अन्य स्वच्छ ईंधन का उपयोग करना होगा. इससे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे कदम दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहद आवश्यक हैं, क्योंकि खान-पान से जुड़ी गतिविधियां भी बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलाती हैं.

डीजल जनरेटरों पर कड़ी पाबंदियां
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर डीजल जनरेटरों के उपयोग पर भी सीमाएं लगाई गई हैं. अब ये जनरेटर केवल आपातकालीन या जरूरी परिस्थितियों में ही चलाए जा सकते हैं. यह कदम उन स्थलों के लिए है जहां बिजली की कटौती या अन्य कारणों से अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही, पुराने वाहनों को भी प्रदूषण फैलाने से रोकने के लिए 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को जुर्माना या जब्ती का भी सामना करना पड़ सकता है. ये कड़े नियम दिल्ली की हवा को साफ बनाने में एक अहम भूमिका निभाएंगे.

यातायात नियंत्रण और पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता
शहर के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है ताकि यातायात को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सके और अनावश्यक इंजन चलाने से बचा जा सके. चालकों को विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे लाल बत्ती पर इंजन बंद रखें, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी. इस तरह के छोटे-छोटे कदम वायु प्रदूषण को कम करने में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं. प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करें और जागरूक होकर स्वच्छ वातावरण बनाने में सहयोग करें.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक
दिल्ली-एनसीआर में GRAP स्टेज 1 लागू करना प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. यह दर्शाता है कि सरकार वायु गुणवत्ता को लेकर गंभीर है और प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस रणनीतियां अपना रही है. दिवाली के त्योहार के करीब होने के कारण पटाखों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों के कारण हवा और भी प्रदूषित हो सकती है, इसलिए प्रशासन की ओर से उठाए गए ये कदम समय की मांग हैं. नागरिकों को भी चाहिए कि वे अपने स्तर पर प्रदूषण घटाने की कोशिश करें, जैसे निजी वाहनों का कम उपयोग, स्वच्छ ईंधन का चयन और खुले में कचरा जलाने से बचना. तभी दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ और स्वस्थ रह सकेगी.

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