Delhi Riots 2020 : उमर खालिद, शरजील इमाम समेत 7 आरोपियों को मिलेगी बेल ? 5 जनवरी को SC सुनाएगा फैसला

दिल्ली के 2020 सांप्रदायिक दंगों से जुड़े UAPA मामले में सात आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगा. आरोपियों के खिलाफ फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ करेगी. इस दंगे में शरजील इमाम, उमर खालिद, गुल्फिशा फातिमा, शिपा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान, मीरान हैदर और शादाब अहमद शामिल थे.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : दिल्ली में साल 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को फैसला सुनाएगी. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ यह निर्णय देंगी. जमानत याचिकाओं में उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद शामिल हैं.

उमर खालिद को न्यूयॉर्क मेयर का पत्र

आपको बता दें कि हाल ही में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद उमर खालिद को एक पत्र लिखा, जिसे उनके साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया. इस पत्र को लेकर भारत में विवाद खड़ा हो गया है और भारतीय जनता पार्टी ने ममदानी पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया.

भारत के लोकतंत्र पर टिप्पणी करने का क्या अधिकार ?
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि न्यूयॉर्क के मेयर को भारत के लोकतंत्र और न्यायपालिका पर टिप्पणी करने का क्या अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भाटिया ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट हैं और जनता अपनी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखती है.


5 जनवरी को आरोपियों के खिलाफ होगी सुनवाई 
आपको बता दें कि दिल्ली दंगे के आरोपियों के खिलाफ फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ करेगी. इस दंगे में शरजील इमाम, उमर खालिद, गुल्फिशा फातिमा, शिपा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान, मीरान हैदर और शादाब अहमद शामिल थे. 

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप पर सख्त संदेश
भाटिया ने यह भी कहा कि भारत अपनी न्यायपालिका और लोकतंत्र की स्वतंत्रता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता और आंतरिक मामलों में किसी भी तरह की दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा.

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