महायुति में रार! देवेंद्र फडणवीस सरकार के फैसले पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मचाया बवाल
Maharashtra politics: महाराष्ट्र में महायुति सरकार के मंत्रालयों के बंटवारे के बाद नासिक और रायगड़ जिलों के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर विवाद शुरू हो गया. शिवसेना ने इस फैसले का विरोध किया. शिवसेना का आरोप है कि यह नियुक्ति स्थानीय समीकरणों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के खिलाफ है. विरोध के बाद सरकार ने इस फैसले पर स्टे (रोक) लगा दी.

Maharashtra politics: महाराष्ट्र में महायुति के तहत गठित नई सरकार के बाद मंत्रालयों के बंटवारे और कार्यों की शुरुआत के बीच एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिली है. रविवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने नासिक और रायगड़ जिलों के लिए प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति का आदेश जारी किया. हालांकि, यह फैसला शिवसेना के लिए विवादास्पद साबित हुआ और पार्टी ने इसका विरोध किया. विवाद इतना बढ़ा कि सरकार को इस फैसले पर देर रात ही स्टे (रोक) लगानी पड़ी.
इस फैसले के खिलाफ एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने तीव्र विरोध दर्ज किया. शिवसेना नेताओं का आरोप है कि सरकार ने प्रभारी मंत्री की नियुक्ति में पारदर्शिता और समानता की अनदेखी की है. खासकर, एनसीपी की नेता अदिति तटकरे को रायगढ़ का प्रभारी मंत्री बनाए जाने से शिवसेना में गुस्सा था. पार्टी का कहना था कि रायगढ़ का प्रभारी मंत्री भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेताओं को सौंपना शिवसेना के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की भावनाओं को नजरअंदाज करने जैसा है.
शिवसेना ने क्यों किया विरोध?
महाराष्ट्र में प्रभारी मंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसे गार्जियन मिनिस्टर भी कहा जाता है. ये मंत्री जिले की विकास योजनाओं और प्रशासनिक मामलों का निरीक्षण करते हैं, जिससे यह पद राजनीतिक दृष्टि से बहुत प्रभावशाली है. रविवार को जैसे ही यह जानकारी मिली कि नासिक और रायगढ़ के प्रभारी मंत्री भाजपा और एनसीपी के नेताओं को नियुक्त किया गया है, शिवसेना के कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया.
प्रभारी मंत्री की नियुक्ति में असंतोष
शिवसेना को उम्मीद थी कि रायगढ़ का प्रभारी मंत्री पद पार्टी के वरिष्ठ नेता भारत गोगावाले को मिलेगा और नासिक की जिम्मेदारी दादा भुसे को दी जाएगी. लेकिन भाजपा और एनसीपी के नेताओं को यह जिम्मेदारी मिलने से शिवसेना में नाराजगी उत्पन्न हुई. पार्टी नेताओं का कहना था कि यह कदम न केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के खिलाफ है, बल्कि इसे एनसीपी और भाजपा के बीच गठजोड़ का परिणाम भी माना जा रहा है.
शिवसेना की आपत्ति और सरकार का कदम
शिवसेना के स्थानीय नेताओं ने यह आरोप लगाया कि गार्जियन मिनिस्टर का पद किसी और दल को देने से स्थानीय हितों को नजरअंदाज किया गया है. इसके कारण, राज्य सरकार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए तत्काल एक बैठक बुलाने का फैसला लिया और प्रभारी मंत्री की नियुक्ति पर स्टे (रोक) लगा दी. सरकार के सूत्रों के अनुसार, अब इस फैसले पर शिवसेना के साथ बातचीत की जाएगी और आम सहमति के आधार पर ही अगला कदम उठाया जाएगा.
स्थानीय स्तर पर असंतोष की आशंका
शिवसेना का कहना है कि इस निर्णय से न केवल रायगढ़ और नासिक में विकास की गति धीमी पड़ेगी, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर भी असंतोष फैलने का खतरा है. यह दो जिले एकनाथ शिंदे के समर्थन वाले क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं, और यहां भाजपा एवं एनसीपी के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति से पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल बनना स्वाभाविक था. शिवसेना के नेता स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि इस निर्णय से पार्टी की स्थिति और कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होगा.


