केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के खिलाफ FIR दर्ज, बिहार चुनाव से पहले EC का सख्त एक्शन

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) के खिलाफ मोकामा में विवादित बयान देने के मामले में FIR दर्ज की गई है. चुनाव आयोग की कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि चुनाव के दौरान सभी नेताओं को कानून और आचार संहिता का पालन करना होगा.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बिहार : बिहार में विधानसभा चुनाव के कुछ ही दिन बचे हैं और चुनावी रणभूमि में राजनीतिक घटनाओं ने जोर पकड़ा है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. मामला मोकामा से जुड़ा है, जहां चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने एक विवादित बयान दिया था. इस बयान में ललन सिंह ने एक नेता को वोटिंग के दिन घर में पैक करने की बात कही थी, जो कि गंभीर आरोपों की श्रेणी में आता है.

क्या है पूरा मामला?

जिला प्रशासन, पटना द्वारा वीडियो निगरानी टीम के फुटेज की जांच के बाद यह मामला सामने आया. जांच के आधार पर ललन सिंह के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. यह कार्रवाई चुनाव आयोग की निगरानी और कानून की पालना सुनिश्चित करने की दिशा में की गई है. एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और जल्द ही तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है.

ललन सिंह ने संभाली प्रचार की जिम्मेदारी 
मोकामा में जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद ललन सिंह ने उनके चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी. इस दौरान उन्होंने जनता से कहा कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी ले ली है. अनंत सिंह की गिरफ्तारी उनके द्वारा निभाए गए राजनीतिक दायित्व और स्थानीय सत्ता में उनकी मजबूती से जुड़ी है. बताया जा रहा है कि अनंत सिंह की गिरफ्तारी दुलारचंद यादव हत्या मामले से संबंधित थी.

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें
बिहार में चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे. पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी. इसके बाद चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. चुनाव से पहले दर्ज FIR और राजनीतिक विवादों ने माहौल और भी गर्म कर दिया है, और सभी दलों के लिए यह चुनाव रणनीति और कानून पालन दोनों की परीक्षा साबित होगा.

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के खिलाफ FIR का मामला यह दर्शाता है कि चुनावी समय में राजनीतिक नेताओं को कानून और आचार संहिता का पालन करना अत्यंत आवश्यक है. प्रशासन और चुनाव आयोग की निगरानी सुनिश्चित कर रही है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो