बंगाल के दक्षिण 24 परगना में लगी भीषण आग, 7 लोगों की दर्दनाक मौत...कई लापता

दक्षिण 24 परगना के नजीराबाद इलाके में दो सटे गोदामों में लगी भीषण आग में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. आग बुझाने में दमकल विभाग को सात घंटे लगे. कई मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं. शवों की हालत खराब होने से पहचान नहीं हो सकी है. राहत-बचाव और मलबा हटाने का काम जारी है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बंगाल : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब अगल-बगल स्थित दो गोदामों में अचानक भीषण आग लग गई. इस घटना में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में करीब सात घंटे का समय लग गया.

सात घंटे बाद बुझी आग, देर शाम मिले शव

यह हादसा कोलकाता के नरेंद्रपुर थाना क्षेत्र के नजीराबाद इलाके में हुआ. दमकल विभाग की टीमों ने लंबे संघर्ष के बाद आग को काबू में किया. तलाशी अभियान के दौरान शाम करीब पांच बजे सबसे पहले तीन शव बरामद किए गए. इसके बाद मलबे को हटाने पर चार और शव मिले, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई.

शवों की पहचान मुश्किल, मलबा हटाने का काम जारी
बारुईपुर जिले के पुलिस अधीक्षक शुभेंदु कुमार ने बताया कि सभी शव बुरी तरह झुलस चुके हैं, जिसके कारण उनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि पूरे मलबे को हटाने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कहीं और लोग तो फंसे नहीं हैं. राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है.

लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका
शुरुआती जानकारी में छह लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी, लेकिन परिजनों का कहना है कि यह संख्या दस से अधिक भी हो सकती है. दरअसल, इन गोदामों में सजावटी सामान बनाने वाली एक इकाई और मोमो निर्माण से जुड़ी कंपनी के मजदूर काम करते थे, जिनमें से कई रात में वहीं मौजूद थे.

घटनास्थल पर जुटे परिजन, बढ़ी बेचैनी
जैसे-जैसे शाम हुई, मृतकों और लापता मजदूरों के परिजन घटनास्थल पर पहुंचने लगे. लोग अग्निशमन और पुलिस अधिकारियों से अपने प्रियजनों की जानकारी लेने की कोशिश करते दिखे. घटनास्थल पर तनाव और गम का माहौल बना हुआ है.

अग्नि सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
राज्य के अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस ने बताया कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने पर उन्होंने कहा कि साल में दो बार फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद गोदाम मालिकों और प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि सभी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए.

अलग-अलग जिलों के थे मृतक और लापता मजदूर
घटनास्थल पर पहुंचे एक व्यक्ति तन्मय गिरि ने बताया कि उनके चाचा पूर्वी मेदिनीपुर के तमलुक के निवासी थे और गोदाम परिसर में बने छोटे कमरों में रहते थे. उन्होंने रात करीब एक बजे आखिरी बार फोन किया था, जिसके बाद से संपर्क टूट गया. वहीं एक अन्य युवक ने बताया कि उसके पिता मोमो बनाने वाली इकाई में नाइट शिफ्ट के लिए आए थे और तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है. मृतक और लापता सभी लोग पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag