टाइप-2 मधुमेह में दवाओं से राहत न मिलने पर मेटाबोलिक सर्जरी कर सकती है जीवन बचाव
भारत में अनियंत्रित मधुमेह गंभीर समस्या बन गया है, जहां दवाओं और जीवनशैली सुधार के बावजूद लाखों मरीजों की शुगर नियंत्रित नहीं होती. दिल्ली एम्स में बीते 15 महीनों में 35 मरीजों की मेटाबोलिक सर्जरी हुई, जिससे मरीजों की शुगर नियंत्रित हुई और दवाएं बंद हो गईं.

नई दिल्ली : भारत में मधुमेह तेजी से बढ़ता जा रहा है और यह केवल सामान्य डायबिटीज़ ही नहीं बल्कि अनियंत्रित मधुमेह का भी संकट बन गया है. ऐसे मरीज जिनकी शुगर दवाओं या जीवनशैली सुधार के बावजूद नियंत्रित नहीं होती, उनका स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है. विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित मधुमेह लंबे समय तक रहने पर किड़नी फेल्योर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, आंखों की बीमारियां और अंग विच्छेदन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. देश में करीब 70 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और इनमें से लाखों लोग जीवन जोखिम भरे स्तर की शुगर के साथ जी रहे हैं.
एम्स में मेटाबोलिक सर्जरी का प्रभाव
सर्जरी के लाभ
डॉ. मंजूनाथ के अनुसार, लंबे समय तक अनियंत्रित मधुमेह वाले मरीजों के अन्य अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं. किड़नी, हृदय और आंखें प्रभावित हो जाती हैं. बेरिएट्रिक सर्जरी के बाद मरीजों का जीवन लगभग सामान्य स्तर पर लौट आता है, अन्य अंगों के खराब होने की संभावना समाप्त हो जाती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है. इस सर्जरी से मरीजों का जीवन लंबा होता है और वे स्वास्थ्यपूर्ण जीवन जी सकते हैं.
कौन करवा सकता है...?
सर्जरी 18 से 65 वर्ष के बीच के मरीज करवा सकते हैं, लेकिन जिन मरीजों का एचबीए1सी स्तर 6.5 तक है, उन्हें इसकी जरूरत नहीं होती. लंबे समय से इंसुलिन लेने वाले या 20-25 साल से अनियंत्रित मधुमेह वाले मरीजों में सर्जरी के परिणाम अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली हो सकते हैं. प्राइवेट अस्पतालों में यह सर्जरी 3 से 6 लाख रुपये तक खर्चीली होती है, जबकि एम्स में इसे कम खर्च में कराया जा सकता है और दो घंटे की सर्जरी के दो दिन बाद मरीज अस्पताल से छुट्टी ले सकता है.


