महाराष्ट्र: 27 नगर निगमों की सत्ता किसके हाथ, BMC समेत 27 नगर निगमों में किस गठबंधन का रहा दबदबा?

महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में महायुति गठबंधन ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है. बीएमसी समेत 27 नगर निगमों पर गठबंधन का नियंत्रण बना हुआ है, जबकि निर्विरोध जीतों और कमजोर विपक्ष ने इसकी बढ़त को और पुख्ता किया है.

Shraddha Mishra

मुंबई: महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है. राज्य के 27 नगर निगमों, जिनमें देश का सबसे बड़ा नगर निकाय बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) भी शामिल है, पर इस समय महायुति का नियंत्रण बना हुआ है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से मिलकर बने इस गठबंधन ने  पिछले चुनावों और हाल की निर्विरोध जीतों के बाद अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है. 

लंबे समय तक कानूनी अड़चनों और प्रशासनिक कारणों से नगर निगम चुनाव टलते रहे थे, जिसके चलते कई नगर निकाय प्रशासकों के अधीन काम कर रहे थे. 15 जनवरी को हुए मतदान और उससे पहले की राजनीतिक गतिविधियों ने यह साफ कर दिया कि महायुति ने इस देरी को अपने पक्ष में भुनाया और शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही.

2017-2022 के चुनावों में भी रहा था दबदबा

पिछले बड़े नगर निगम चुनाव, जो लगभग 2017 से 2022 के बीच हुए थे, उनमें भाजपा और तत्कालीन सहयोगी शिवसेना ने मिलकर 27 में से 15 नगर निगमों में सत्ता हासिल की थी. भाजपा ने पुणे, नागपुर, पिंपरी-चिंचवाड़, मीरा-भायंदर और जलगांव सहित 13 नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था. वहीं शिवसेना ने ठाणे नगर निगम पर अपना कब्जा बनाए रखा था. बीएमसी, जो 227 सीटों वाला देश का सबसे बड़ा नगर निगम है, वहां भाजपा और शिवसेना ने मिलकर पूरे कार्यकाल तक शासन किया और मुंबई जैसे विशाल महानगर के नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली.

बाद के वर्षों में शिवसेना और एनसीपी में हुए विभाजन से राजनीतिक समीकरण जरूर बदले, लेकिन इसका सीधा लाभ महायुति को मिला. 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद गठबंधन ने राज्य की सत्ता बरकरार रखी, जिसका असर अब नगर निगम चुनावों में भी देखने को मिला.

निर्विरोध जीतों ने बनाई मजबूत नींव

15 जनवरी के मतदान से पहले ही महायुति को बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ मिल चुका था. गठबंधन ने विभिन्न नगर निगमों में कई दर्जन सीटें निर्विरोध जीत ली थीं. इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी भाजपा की रही, जिसे कई प्रमुख शहरों में बिना मुकाबले जीत मिली. शिंदे गुट की शिवसेना और एनसीपी को भी अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में फायदा हुआ. इन निर्विरोध जीतों ने न केवल चुनावी गणित को आसान बनाया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) शहरी क्षेत्रों में महायुति को कड़ी चुनौती देने की स्थिति में नहीं दिखी. 

आगे क्या संकेत मिलते हैं?

15 जनवरी के बाद के हालात देखें तो यह साफ है कि महायुति ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. बीएमसी समेत कई प्रमुख नगर निगमों में गठबंधन की स्थिति प्रभावशाली बनी हुई है. आने वाले वर्षों में शहरी विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़े फैसलों में महायुति की भूमिका निर्णायक रहने की संभावना है. विपक्ष के लिए यह नतीजे एक साफ संदेश हैं कि शहरी मतदाता अभी भी सत्तारूढ़ गठबंधन पर भरोसा जता रहा है.

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