कृष्ण जन्मभूमि में नंदलाल का हुआ जन्म, दूध से हुआ कान्हा जी का रुद्राभिषेक

मथुरा में रात 12 बजे के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर ढोल, नगाड़ों और मृदंग की गूंज के बीच श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का शुभारंभ हुआ.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

रात 12 बजे के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर ढोल, नगाड़ों और मृदंग की गूंज के बीच श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का शुभारंभ हुआ. प्रभु के प्राकट्य की उमंग में भक्तों की खुशी देखते ही बन रही है. मंदिर के हर कोने में "नंदलाल की जय" के जयकारे गूंजने लगे और श्रद्धालु भक्ति में झूमते दिखाई दिए.

मथुरा और वृंदावन में भक्तिमय वातावरण

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा और वृंदावन पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में नहाए नजर आ रहे हैं. दोनों तीर्थनगरीयों को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में भाग लेने पहुंचे हैं. अनुमान है कि इस बार लगभग 60 लाख श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साक्षी बनने आए हैं.

न केवल मथुरा-वृंदावन, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज के मंदिरों को भी विशेष सजावट से सुसज्जित किया गया है. मंदिरों में आकर्षक लाइटिंग, फूलों की सजावट और भव्य झांकियां श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही हैं.

सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर व्यापक इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं. जगह-जगह पुलिस बल तैनात है और ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखने के लिए रूट डायवर्जन जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था का उल्लास और भक्ति की लहर देखने को मिल रही है, जहां भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य को लेकर गदगद हैं और पूरे उत्साह से जन्मोत्सव मना रहे हैं.

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