संजय राउत का बड़ा बयान, 'लोकसभा चुनाव से पहले जागता है INDIA अलायंस'

संजय राउत ने गठबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यह गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के समय ही सक्रिय होता है और बाकी समय सहयोगी दलों के बीच कोई ठोस संवाद नहीं होता. 

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को पूर्ण बहुमत से दूर रखने के बाद उत्साह से भरा विपक्षी INDIA गठबंधन अब आंतरिक मतभेदों से जूझता नजर आ रहा है. हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हालिया चुनावी नतीजों ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में मिली हार ने सहयोगी दलों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया है. इस स्थिति में गठबंधन के भीतर संवाद की कमी और रणनीतिक असहमति खुलकर सामने आने लगी है.

महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने गठबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यह गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के समय ही सक्रिय होता है और बाकी समय सहयोगी दलों के बीच कोई ठोस संवाद नहीं होता. उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर ही बैठकों और रणनीति पर चर्चा शुरू होती है, जबकि सामान्य समय में गठबंधन की गतिविधियां लगभग ठप रहती हैं.

राउत ने यह भी कहा कि सिर्फ संसद में विरोध दर्ज कराने से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को संसद में अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, यहां तक कि राहुल गांधी को भी कई बार बोलने से रोका जाता है. ऐसी परिस्थितियों में विपक्ष की प्रभावशीलता सीमित हो जाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय रहना चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों पर निरंतर आवाज उठानी चाहिए.

उन्होंने किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति और मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संयुक्त रूप से सरकार पर दबाव बनाने की आवश्यकता बताई. राउत ने चेतावनी दी कि यदि गठबंधन केवल औपचारिक रूप से सक्रिय रहेगा और जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं करेगा तो इसका राजनीतिक नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई बार सहयोगी दल महीनों या वर्षों तक आपस में बातचीत तक नहीं करते, जिससे गठबंधन की एकजुटता कमजोर होती है. उन्होंने उद्धव ठाकरे सहित सभी नेताओं की इच्छा जताई कि गठबंधन हर समय सक्रिय और संगठित रहे.

गठबंधन के नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों पर राउत ने कहा कि इस बारे में अलग-अलग नेताओं की अलग राय हो सकती है. कुछ लोग ममता बनर्जी या एम. के. स्टालिन को नेतृत्व सौंपने की बात कर रहे हैं, लेकिन इस पर कोई भी फैसला केवल औपचारिक बैठक के बाद ही लिया जा सकता है.

इस साल पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, जिनकी तारीखों का ऐलान जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा सकता है. ऐसे में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी एकजुटता बनाए रखना और साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ना है.

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